search
Q: A collective term used by the Jaine for their sacred books is जैनियों द्वारा अपने पवित्र ग्रन्थों के लिए सामूहिक रूप से किस शब्द का प्रयोग किया जाता है?
  • A. Prabandhas/प्रबंध
  • B. Angas/अंग
  • C. Nibandhas/निबन्ध
  • D. Charits/चरित
Correct Answer: Option B - जैनियों द्वारा अपने पवित्र ग्रन्थों के लिए सामूहिक रूप से जैन आगम (साहित्य) शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसके अन्तर्गत 12 अंग 12 उपांग, 6 छेदसूत्र, 4 मूलसूत्र 10 प्रकीर्णक, 2 चूलिका सूत्र, नन्दीसूत्र एवं अनुयोगद्वार को सम्मिलित किया जाता है। अंगों एवं उपांगों पर जो भाष्य लिखे गये है वे निर्युक्ति, चूर्णि, एवं टीका, कहलाते है। क्योकि विकल्प में आगम शब्द का उल्लेख नहीं है इसलिए अंग माना जा सकता है।
B. जैनियों द्वारा अपने पवित्र ग्रन्थों के लिए सामूहिक रूप से जैन आगम (साहित्य) शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसके अन्तर्गत 12 अंग 12 उपांग, 6 छेदसूत्र, 4 मूलसूत्र 10 प्रकीर्णक, 2 चूलिका सूत्र, नन्दीसूत्र एवं अनुयोगद्वार को सम्मिलित किया जाता है। अंगों एवं उपांगों पर जो भाष्य लिखे गये है वे निर्युक्ति, चूर्णि, एवं टीका, कहलाते है। क्योकि विकल्प में आगम शब्द का उल्लेख नहीं है इसलिए अंग माना जा सकता है।

Explanations:

जैनियों द्वारा अपने पवित्र ग्रन्थों के लिए सामूहिक रूप से जैन आगम (साहित्य) शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसके अन्तर्गत 12 अंग 12 उपांग, 6 छेदसूत्र, 4 मूलसूत्र 10 प्रकीर्णक, 2 चूलिका सूत्र, नन्दीसूत्र एवं अनुयोगद्वार को सम्मिलित किया जाता है। अंगों एवं उपांगों पर जो भाष्य लिखे गये है वे निर्युक्ति, चूर्णि, एवं टीका, कहलाते है। क्योकि विकल्प में आगम शब्द का उल्लेख नहीं है इसलिए अंग माना जा सकता है।