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Q: (70-75): निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकलप को चुनिए। पंखों से रे, फैले फैले ताड़ों के दल, लंबी-लंबी अँगुलियाँ हैं चौड़े करतल। तड़-तड़ पड़ती धार वारि की उन पर चंचल, टप-टप झरतीं कर मुख से जल बूँदें झलमल। नाच रहे पागल हो ताली दे दे चल-दल, झूम-झूम सिर नीम हिलातीं सुख से विह्वल। हरसिंगार झरते, बेला कलि बढ़ती पल पल, हँसमुख हरियाली में खग कुल गाते मंगल? कविता में प्रकृति को सुख किससे मिल रहा है?
  • A. झरनों के टपकने से।
  • B. तालियाँ बजाने से।
  • C. पक्षियों के गाने से।
  • D. बारिश होने से।
Correct Answer: Option D - काव्यांश के अनुसार प्रकृति को बारिश होने से सुख मिल रहा है। झरनों के टपकने से, तालियाँ बजाने से एवं पक्षियों के गाने से प्रकृति को सुख नहीं मिलता।
D. काव्यांश के अनुसार प्रकृति को बारिश होने से सुख मिल रहा है। झरनों के टपकने से, तालियाँ बजाने से एवं पक्षियों के गाने से प्रकृति को सुख नहीं मिलता।

Explanations:

काव्यांश के अनुसार प्रकृति को बारिश होने से सुख मिल रहा है। झरनों के टपकने से, तालियाँ बजाने से एवं पक्षियों के गाने से प्रकृति को सुख नहीं मिलता।