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Q: 1857 के विद्रोह का बिहार में 15 जुलाई, 1857 से 20 जनवरी, 1858 तक केंद्र था–
  • A. रामपुर
  • B. हमीरपुर
  • C. धीरपुर
  • D. जगदीशपुर
Correct Answer: Option D - 15 जुलाई 1857 से 20 जनवरी 1958 तक जगदीशपुर 1857 के विद्रोह का केन्द्र था। 11 मई, 1857 को मेरठ से आये सिपाहियों का एक दस्ता यमुना पार कर दिल्ली पहुंचा। कम्पनी के राजनीतिक एजेन्ट साइमन फ्रेजर समेत सैकड़ों अंग्रेज इस अभियान में मारे गये। इस तरह सत्ता केंद्र और प्रतीक के रूप में दिल्ली पर कब्जे के साथ 1857 ई. के विद्रोह की शुरूआत हुयी। यह विद्रोह कानपुर, लखनऊ, बनारस, इलाहाबाद, बरेली, जगदीशपुर और झांसी तक फैल गया। जगदीशपुर में वयोवृद्ध जमींदार कुवर सिंह ने विद्रोह का नेतृत्व किया। इस विद्रोह का नेतृत्व कानपुर में पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने तथा लखनऊ में बेगम हजरत महल, झांसी में रानी लक्ष्मीबाई ने तथा बरेली में रूहेलखंड के भूतपूर्व शासक के उत्तराधिकारी खान बहादुर ने की।
D. 15 जुलाई 1857 से 20 जनवरी 1958 तक जगदीशपुर 1857 के विद्रोह का केन्द्र था। 11 मई, 1857 को मेरठ से आये सिपाहियों का एक दस्ता यमुना पार कर दिल्ली पहुंचा। कम्पनी के राजनीतिक एजेन्ट साइमन फ्रेजर समेत सैकड़ों अंग्रेज इस अभियान में मारे गये। इस तरह सत्ता केंद्र और प्रतीक के रूप में दिल्ली पर कब्जे के साथ 1857 ई. के विद्रोह की शुरूआत हुयी। यह विद्रोह कानपुर, लखनऊ, बनारस, इलाहाबाद, बरेली, जगदीशपुर और झांसी तक फैल गया। जगदीशपुर में वयोवृद्ध जमींदार कुवर सिंह ने विद्रोह का नेतृत्व किया। इस विद्रोह का नेतृत्व कानपुर में पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने तथा लखनऊ में बेगम हजरत महल, झांसी में रानी लक्ष्मीबाई ने तथा बरेली में रूहेलखंड के भूतपूर्व शासक के उत्तराधिकारी खान बहादुर ने की।

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15 जुलाई 1857 से 20 जनवरी 1958 तक जगदीशपुर 1857 के विद्रोह का केन्द्र था। 11 मई, 1857 को मेरठ से आये सिपाहियों का एक दस्ता यमुना पार कर दिल्ली पहुंचा। कम्पनी के राजनीतिक एजेन्ट साइमन फ्रेजर समेत सैकड़ों अंग्रेज इस अभियान में मारे गये। इस तरह सत्ता केंद्र और प्रतीक के रूप में दिल्ली पर कब्जे के साथ 1857 ई. के विद्रोह की शुरूआत हुयी। यह विद्रोह कानपुर, लखनऊ, बनारस, इलाहाबाद, बरेली, जगदीशपुर और झांसी तक फैल गया। जगदीशपुर में वयोवृद्ध जमींदार कुवर सिंह ने विद्रोह का नेतृत्व किया। इस विद्रोह का नेतृत्व कानपुर में पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने तथा लखनऊ में बेगम हजरत महल, झांसी में रानी लक्ष्मीबाई ने तथा बरेली में रूहेलखंड के भूतपूर्व शासक के उत्तराधिकारी खान बहादुर ने की।