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निर्देश (प्र. सं. 95-99) निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए। भारत अब प्रौढ़ावस्था में आ पहुँचा है। भीषण घात-प्रतिघात से साक्षात्कार करते हुए भी उसने बहुमुखी विकास किया है, इसमें सन्हेद नही। लेकिन उसका एक प्रकोष्ठ अन्धकार में अभी भी डूबा हुआ है- हृदय, जोकि मानवीय क्रिया व्यापार का नियन्ता है। इस समय वह स्वार्थपरता और भोगवाद के ऐसे रोग से ग्रसित हो गया है जिसके कारण मानवीय आचरण भी बनैला हो गया है। क्षेत्रवाद, जातिवाद, भाषावाद, सम्प्रदायवाद-प्रभृति विभिषिकाएँ जो आजादी के साथ उपहार में मिली थीं, आए दिन कहीं-न-कहीं अपनी लोमहर्षक जलीला सम्पन्न करती रहती है। परिणामस्वरूप शिथिल पड़ते अनुशासन के बन्धन, विखण्डित होती श्रद्धा और कलंकित होता विश्वास; मानवता के लिए काँटों की सेज बन प्रस्तुत हो रहे हैं। फिर भी 21वीं सदी में प्रवेश की अधीरता ही सर्वाधिक रही है। कतिपय लोल कपोलों की कृत्रिम रंगीनियाँ समूह देशवासियों का पर्याय मान लेना उचित नहीं। अत: कल्पना के भव्य महलों के ध्वंसावशेषों पर यथार्थ की झोपडि़यों का निर्माण ही उचित होगा। वह शब्द बताइए जिसमें सन्धि तथा प्रत्यय दोनों का प्रयोग हुआ है–