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Q: .
  • A. गोसाईं
  • B. लछमा का बाप
  • C. हवलदार धरमसिंह
  • D. लछमा
Correct Answer: Option B - ‘जिसके आगे-पीछे भाई-बहिन, माई-बाप नहीं, परदेश में बन्दूक की नोक पर जान रखने वाले को छोकरी कैसे दे दें।’ कहानी ‘कोसी का घटवार’ का यह कथन लछमा के बाप का है। ‘कोसी का घटवार’ (1958) शेखर जोशी द्वारा रचित कहानी है। यह कहानी पहाड़ के परिवेश में दो प्रेमियों गुसाईं और लछमा की कहानी है, जो एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं लेकिन सामाजिक बंधनों और परिस्थितियों के कारण एक साथ नहीं रह पाते। साथ के लोग (1978 ई.), हलवाहा (1981 ई.), मेरा पहाड़ (1989 ई.), नौरंगी बीमार है (1990 ई.), डाँगरी वाले (1994 ई.) शेखर जोशी द्वारा रचित अन्य महत्वपूर्ण कहानी संग्रह हैं।
B. ‘जिसके आगे-पीछे भाई-बहिन, माई-बाप नहीं, परदेश में बन्दूक की नोक पर जान रखने वाले को छोकरी कैसे दे दें।’ कहानी ‘कोसी का घटवार’ का यह कथन लछमा के बाप का है। ‘कोसी का घटवार’ (1958) शेखर जोशी द्वारा रचित कहानी है। यह कहानी पहाड़ के परिवेश में दो प्रेमियों गुसाईं और लछमा की कहानी है, जो एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं लेकिन सामाजिक बंधनों और परिस्थितियों के कारण एक साथ नहीं रह पाते। साथ के लोग (1978 ई.), हलवाहा (1981 ई.), मेरा पहाड़ (1989 ई.), नौरंगी बीमार है (1990 ई.), डाँगरी वाले (1994 ई.) शेखर जोशी द्वारा रचित अन्य महत्वपूर्ण कहानी संग्रह हैं।

Explanations:

‘जिसके आगे-पीछे भाई-बहिन, माई-बाप नहीं, परदेश में बन्दूक की नोक पर जान रखने वाले को छोकरी कैसे दे दें।’ कहानी ‘कोसी का घटवार’ का यह कथन लछमा के बाप का है। ‘कोसी का घटवार’ (1958) शेखर जोशी द्वारा रचित कहानी है। यह कहानी पहाड़ के परिवेश में दो प्रेमियों गुसाईं और लछमा की कहानी है, जो एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं लेकिन सामाजिक बंधनों और परिस्थितियों के कारण एक साथ नहीं रह पाते। साथ के लोग (1978 ई.), हलवाहा (1981 ई.), मेरा पहाड़ (1989 ई.), नौरंगी बीमार है (1990 ई.), डाँगरी वाले (1994 ई.) शेखर जोशी द्वारा रचित अन्य महत्वपूर्ण कहानी संग्रह हैं।