Correct Answer:
Option A - ‘‘भेख है यह। आप विचार कर देखिए। जैसे आपका यह खध्धड़ कपड़ा है। मलमल और मारकीन कपड़ा पहनने वाले मन से भले ही महतमा जी के पन्थ को माने, लेकिन आप उन्हें सुराजी तो नहीं कहिएगा’’
उपर्युक्त कथन ‘मैला आँचल’ के पात्र ‘लछमी’ के द्वारा कहा गया है। जबकि अन्य पात्रों के कथन निम्नवत् हैं-
बालदेव - ‘‘तुम तो आज आए हो, हम सन् तीस से जानते हैं। टीक-मोंछ काटकर मुर्गी का अंडा खिलाकर कामरेड बनाया जाता है। कफ जेहल में कितने लोगों को कामरेड होते देखा है। मुजफ्फरपुर कू एक सोशलिस्ट नेता थे। उनका काम यही था लोगों की टीक मोंछ काटना।’’
डॉ. प्रशान्त का कथन - ‘‘दिल नाम की कोई चीज आदमी के शरीर में है, हमें नहीं मालूम। पता नहीं आदमी लंग्स को दिल कहता है या हॉर्ट को। जो भी हो हार्ट, लंग्स लीवर का प्रेम से कोई संंबंध नहीं है।’’
बावनदास का कथन - ‘‘पिकेटिंग के समय कांग्रेस के वालेंटियरों को पीटने वाला चानमल मारवाड़ी का बेटा सागरमल नरपत नगर थाना कांग्रेस का सभापति है जबकि नेपाल से लड़कियाँ भगाकर लाने वाला दुलारचंद कापरा कटहा थाने का सेव्रेâटरी है।’’
कालीचरण के कथन - ‘‘यह जो लाल झंडा है आपका झंडा है, जनता का झंडा है, अवाम का झंडा है, इंकलाब का झंडा है। इसकी लाली उगते हुए आफताब की लाली है। यह खुद आफताब है। इसकी लाली, इसका रंग क्या है रंग नहीं है। यह गरीबों, महरूमों, मजदूरों के खून में रंगा हुआ झंडा है।’’
A. ‘‘भेख है यह। आप विचार कर देखिए। जैसे आपका यह खध्धड़ कपड़ा है। मलमल और मारकीन कपड़ा पहनने वाले मन से भले ही महतमा जी के पन्थ को माने, लेकिन आप उन्हें सुराजी तो नहीं कहिएगा’’
उपर्युक्त कथन ‘मैला आँचल’ के पात्र ‘लछमी’ के द्वारा कहा गया है। जबकि अन्य पात्रों के कथन निम्नवत् हैं-
बालदेव - ‘‘तुम तो आज आए हो, हम सन् तीस से जानते हैं। टीक-मोंछ काटकर मुर्गी का अंडा खिलाकर कामरेड बनाया जाता है। कफ जेहल में कितने लोगों को कामरेड होते देखा है। मुजफ्फरपुर कू एक सोशलिस्ट नेता थे। उनका काम यही था लोगों की टीक मोंछ काटना।’’
डॉ. प्रशान्त का कथन - ‘‘दिल नाम की कोई चीज आदमी के शरीर में है, हमें नहीं मालूम। पता नहीं आदमी लंग्स को दिल कहता है या हॉर्ट को। जो भी हो हार्ट, लंग्स लीवर का प्रेम से कोई संंबंध नहीं है।’’
बावनदास का कथन - ‘‘पिकेटिंग के समय कांग्रेस के वालेंटियरों को पीटने वाला चानमल मारवाड़ी का बेटा सागरमल नरपत नगर थाना कांग्रेस का सभापति है जबकि नेपाल से लड़कियाँ भगाकर लाने वाला दुलारचंद कापरा कटहा थाने का सेव्रेâटरी है।’’
कालीचरण के कथन - ‘‘यह जो लाल झंडा है आपका झंडा है, जनता का झंडा है, अवाम का झंडा है, इंकलाब का झंडा है। इसकी लाली उगते हुए आफताब की लाली है। यह खुद आफताब है। इसकी लाली, इसका रंग क्या है रंग नहीं है। यह गरीबों, महरूमों, मजदूरों के खून में रंगा हुआ झंडा है।’’