search
Q: .
  • A. केवल (A) और (B)
  • B. केवल (D) और (E)
  • C. केवल (A) और (D)
  • D. केवल (A) और (E)
Correct Answer: Option D - अरस्तू के त्रासदी संबंधी सत्य कथन निम्नलिखित- 1. अरस्तू त्रासदी के लिए दुखान्त होना अनिवार्य मानते थे। 2. अरस्तू का मानना है कि बिना चरित्र-चित्रण के त्रासदी संभव नहीं है, किन्तु कार्य व्यापार की अवहेलना की जा सकती है। • अरस्तू प्रथम काव्यशास्त्री थे जिन्होने उपयोगी कला (Art) और ललित कला (Fine Art) का भेद स्पष्ट किया और ललित कला की स्वायत्तता घोषित की। • अरस्तू ने केवल गंभीर कार्य की अनुकृति को त्रासदी का विषय माना है। • अरस्तू का विचार है कि त्रासदी का कार्य अपने आप में पूर्ण होना चाहिए। • कथावस्तु से अरस्तू का तात्पर्य घटनाओं के विन्यास से है। यह कथावस्तु को त्रासदी की आत्मा मानता है।
D. अरस्तू के त्रासदी संबंधी सत्य कथन निम्नलिखित- 1. अरस्तू त्रासदी के लिए दुखान्त होना अनिवार्य मानते थे। 2. अरस्तू का मानना है कि बिना चरित्र-चित्रण के त्रासदी संभव नहीं है, किन्तु कार्य व्यापार की अवहेलना की जा सकती है। • अरस्तू प्रथम काव्यशास्त्री थे जिन्होने उपयोगी कला (Art) और ललित कला (Fine Art) का भेद स्पष्ट किया और ललित कला की स्वायत्तता घोषित की। • अरस्तू ने केवल गंभीर कार्य की अनुकृति को त्रासदी का विषय माना है। • अरस्तू का विचार है कि त्रासदी का कार्य अपने आप में पूर्ण होना चाहिए। • कथावस्तु से अरस्तू का तात्पर्य घटनाओं के विन्यास से है। यह कथावस्तु को त्रासदी की आत्मा मानता है।

Explanations:

अरस्तू के त्रासदी संबंधी सत्य कथन निम्नलिखित- 1. अरस्तू त्रासदी के लिए दुखान्त होना अनिवार्य मानते थे। 2. अरस्तू का मानना है कि बिना चरित्र-चित्रण के त्रासदी संभव नहीं है, किन्तु कार्य व्यापार की अवहेलना की जा सकती है। • अरस्तू प्रथम काव्यशास्त्री थे जिन्होने उपयोगी कला (Art) और ललित कला (Fine Art) का भेद स्पष्ट किया और ललित कला की स्वायत्तता घोषित की। • अरस्तू ने केवल गंभीर कार्य की अनुकृति को त्रासदी का विषय माना है। • अरस्तू का विचार है कि त्रासदी का कार्य अपने आप में पूर्ण होना चाहिए। • कथावस्तु से अरस्तू का तात्पर्य घटनाओं के विन्यास से है। यह कथावस्तु को त्रासदी की आत्मा मानता है।