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Q: .
  • A. केवल A, D, E
  • B. केवल A,B, E
  • C. केवल A, C, E
  • D. केवल A, C, D
Correct Answer: Option D - आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने सरस्वती में प्रकाशित इंदुमती – किशोलीलाल गोस्वामी, दुलाई वाली – बंग महिला तथा ग्यारह वर्ष का समय – रामचंद्र शुक्ल की कहानियों को र्मािमकता की दृष्टि से भाव प्रधान कहानियों के रूप में माना है। शुक्ल जी ने लिखा है कि यदि ‘इंदुमती’ किसी बँगला कहानी की छाया नहीं है तो हिन्दी की यही पहली मौलिक कहानी ठहरती है। इसके उपरान्त ‘ग्यारह वर्ष का समय’ फिर ‘दुलाई वाली’ का नम्बर आता है। शुक्ल जी के अनुसार – कहानियों का आरंभ कहाँ से मानना चाहिए, यह देखने के लिए ‘सरस्वती’ में प्रकाशित कुछ मौलिक कहानियों के नाम वर्ष क्रम से नीचे दिए जा रहे हैं- कहानी लेखक प्रकाशन इंदुमती किशोरी लाल गोस्वामी सं. 1957 गुलबहार किशोरी लाल गोस्वामी सं. 1959 प्लेग की चुड़ैल मास्टर भगवानदास सं. 1959 ग्यारह वर्ष का समय रामचंद्र शुक्ल सं. 1960 पंडित और पंडितानी गिरिजादत्त वाजपेयी सं. 1960 दुलाईवाली बंग महिला सं. 1964
D. आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने सरस्वती में प्रकाशित इंदुमती – किशोलीलाल गोस्वामी, दुलाई वाली – बंग महिला तथा ग्यारह वर्ष का समय – रामचंद्र शुक्ल की कहानियों को र्मािमकता की दृष्टि से भाव प्रधान कहानियों के रूप में माना है। शुक्ल जी ने लिखा है कि यदि ‘इंदुमती’ किसी बँगला कहानी की छाया नहीं है तो हिन्दी की यही पहली मौलिक कहानी ठहरती है। इसके उपरान्त ‘ग्यारह वर्ष का समय’ फिर ‘दुलाई वाली’ का नम्बर आता है। शुक्ल जी के अनुसार – कहानियों का आरंभ कहाँ से मानना चाहिए, यह देखने के लिए ‘सरस्वती’ में प्रकाशित कुछ मौलिक कहानियों के नाम वर्ष क्रम से नीचे दिए जा रहे हैं- कहानी लेखक प्रकाशन इंदुमती किशोरी लाल गोस्वामी सं. 1957 गुलबहार किशोरी लाल गोस्वामी सं. 1959 प्लेग की चुड़ैल मास्टर भगवानदास सं. 1959 ग्यारह वर्ष का समय रामचंद्र शुक्ल सं. 1960 पंडित और पंडितानी गिरिजादत्त वाजपेयी सं. 1960 दुलाईवाली बंग महिला सं. 1964

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आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने सरस्वती में प्रकाशित इंदुमती – किशोलीलाल गोस्वामी, दुलाई वाली – बंग महिला तथा ग्यारह वर्ष का समय – रामचंद्र शुक्ल की कहानियों को र्मािमकता की दृष्टि से भाव प्रधान कहानियों के रूप में माना है। शुक्ल जी ने लिखा है कि यदि ‘इंदुमती’ किसी बँगला कहानी की छाया नहीं है तो हिन्दी की यही पहली मौलिक कहानी ठहरती है। इसके उपरान्त ‘ग्यारह वर्ष का समय’ फिर ‘दुलाई वाली’ का नम्बर आता है। शुक्ल जी के अनुसार – कहानियों का आरंभ कहाँ से मानना चाहिए, यह देखने के लिए ‘सरस्वती’ में प्रकाशित कुछ मौलिक कहानियों के नाम वर्ष क्रम से नीचे दिए जा रहे हैं- कहानी लेखक प्रकाशन इंदुमती किशोरी लाल गोस्वामी सं. 1957 गुलबहार किशोरी लाल गोस्वामी सं. 1959 प्लेग की चुड़ैल मास्टर भगवानदास सं. 1959 ग्यारह वर्ष का समय रामचंद्र शुक्ल सं. 1960 पंडित और पंडितानी गिरिजादत्त वाजपेयी सं. 1960 दुलाईवाली बंग महिला सं. 1964