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Q: .
  • A. अनुनासिक
  • B. अयोगवाह
  • C. निरनुंनासिक
  • D. नासिक्य
Correct Answer: Option A - ‘हँसना’ शब्द में चंद्रिंबदु का प्रयोग होता है। इसमें चंद्रिंबदु `अनुनासिक' है। अनुनासिक ( ँ ) का उच्चारण नाक और मुँह से होता है। इनके उच्चारण में लघुता होती है, जैसे–गाँव, दाँत इत्यादि। केवल मुँह से बोले जाने वाले सस्वर वर्णों को निरनुनासिक कहते हैं, जैसे–इधर, उधर, आप इत्यादि। अनुस्वार ( ) और विसर्ग (:) अयोगवाह ध्वनियाँ हैं।
A. ‘हँसना’ शब्द में चंद्रिंबदु का प्रयोग होता है। इसमें चंद्रिंबदु `अनुनासिक' है। अनुनासिक ( ँ ) का उच्चारण नाक और मुँह से होता है। इनके उच्चारण में लघुता होती है, जैसे–गाँव, दाँत इत्यादि। केवल मुँह से बोले जाने वाले सस्वर वर्णों को निरनुनासिक कहते हैं, जैसे–इधर, उधर, आप इत्यादि। अनुस्वार ( ) और विसर्ग (:) अयोगवाह ध्वनियाँ हैं।

Explanations:

‘हँसना’ शब्द में चंद्रिंबदु का प्रयोग होता है। इसमें चंद्रिंबदु `अनुनासिक' है। अनुनासिक ( ँ ) का उच्चारण नाक और मुँह से होता है। इनके उच्चारण में लघुता होती है, जैसे–गाँव, दाँत इत्यादि। केवल मुँह से बोले जाने वाले सस्वर वर्णों को निरनुनासिक कहते हैं, जैसे–इधर, उधर, आप इत्यादि। अनुस्वार ( ) और विसर्ग (:) अयोगवाह ध्वनियाँ हैं।