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Q: .
  • A. श्वेत
  • B. लाल
  • C. काला
  • D. हरा
Correct Answer: Option D - ‘शिवमूर्ति’ निबंध के अनुसार मूर्तियों का मुख्य रंग ‘हरा’ नहीं है। • प्रताप नारायण मिश्र कृत ‘शिवमूर्ति’ निबन्ध में कई प्रकार से बनी मूर्तियों के उल्लेख के साथ उनकी सार्थकता पर चर्चा हुई है, सफेद, लाल और काले रंग की महत्ता मूर्तियों से जोड़कर बताई गई है। • लेखक ने शैव-वैष्णव सामंजस्य की भी कोशिश की है। • प्रताप नारायण मिश्र को आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी का ‘एडिशन’ कहा है। • प्रताप नारायण मिश्र ने ब्राह्मण पत्रिका का प्रकाशन 1883 ई. में किया। इनके प्रमुख निबन्ध – धोखा, दाँत, आप, नारी, समझदार की मौत, होली है अथवा होरी, ईश्वर की मूर्ति, घूरे का लत्ता बिनै, सोने का डंडा, कनातन के ढोल बाँधे, अपव्यय, वृद्ध, दान आदि।
D. ‘शिवमूर्ति’ निबंध के अनुसार मूर्तियों का मुख्य रंग ‘हरा’ नहीं है। • प्रताप नारायण मिश्र कृत ‘शिवमूर्ति’ निबन्ध में कई प्रकार से बनी मूर्तियों के उल्लेख के साथ उनकी सार्थकता पर चर्चा हुई है, सफेद, लाल और काले रंग की महत्ता मूर्तियों से जोड़कर बताई गई है। • लेखक ने शैव-वैष्णव सामंजस्य की भी कोशिश की है। • प्रताप नारायण मिश्र को आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी का ‘एडिशन’ कहा है। • प्रताप नारायण मिश्र ने ब्राह्मण पत्रिका का प्रकाशन 1883 ई. में किया। इनके प्रमुख निबन्ध – धोखा, दाँत, आप, नारी, समझदार की मौत, होली है अथवा होरी, ईश्वर की मूर्ति, घूरे का लत्ता बिनै, सोने का डंडा, कनातन के ढोल बाँधे, अपव्यय, वृद्ध, दान आदि।

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‘शिवमूर्ति’ निबंध के अनुसार मूर्तियों का मुख्य रंग ‘हरा’ नहीं है। • प्रताप नारायण मिश्र कृत ‘शिवमूर्ति’ निबन्ध में कई प्रकार से बनी मूर्तियों के उल्लेख के साथ उनकी सार्थकता पर चर्चा हुई है, सफेद, लाल और काले रंग की महत्ता मूर्तियों से जोड़कर बताई गई है। • लेखक ने शैव-वैष्णव सामंजस्य की भी कोशिश की है। • प्रताप नारायण मिश्र को आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी का ‘एडिशन’ कहा है। • प्रताप नारायण मिश्र ने ब्राह्मण पत्रिका का प्रकाशन 1883 ई. में किया। इनके प्रमुख निबन्ध – धोखा, दाँत, आप, नारी, समझदार की मौत, होली है अथवा होरी, ईश्वर की मूर्ति, घूरे का लत्ता बिनै, सोने का डंडा, कनातन के ढोल बाँधे, अपव्यय, वृद्ध, दान आदि।