Correct Answer:
Option D - अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ कृत प्रियप्रवास का प्रकाशन वर्ष 1914ई. है। ‘प्रियप्रवास’ को खड़ी बोली हिंदी का प्रथम महाकाव्य माना जाता है। प्रियप्रवास का सर्वप्रथम नाम ब्रजांगना विलाप था। यह सम्पूर्ण काव्य संस्कृत के वर्ण वृत्तों पर आधारित है।
हरिऔध ने तीन प्रबंध काव्य लिखें- प्रिय प्रवास (1914 ई.- 17 सर्ग), पारिजात (1937 ई. 15 सर्ग), वैदेही वनवास (1940 ई. 18 सर्ग)। हरिऔध कृत ब्रजभाषा में रचित ‘रसकलश’ (1931ई.) एक रीतिग्रंथ है।
हरिऔध को कवि सम्राट कहा जाता है तथा प्रियप्रवास पर इन्हे मंगला प्रसाद पारितोषिक प्रदान किया गया था।
D. अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ कृत प्रियप्रवास का प्रकाशन वर्ष 1914ई. है। ‘प्रियप्रवास’ को खड़ी बोली हिंदी का प्रथम महाकाव्य माना जाता है। प्रियप्रवास का सर्वप्रथम नाम ब्रजांगना विलाप था। यह सम्पूर्ण काव्य संस्कृत के वर्ण वृत्तों पर आधारित है।
हरिऔध ने तीन प्रबंध काव्य लिखें- प्रिय प्रवास (1914 ई.- 17 सर्ग), पारिजात (1937 ई. 15 सर्ग), वैदेही वनवास (1940 ई. 18 सर्ग)। हरिऔध कृत ब्रजभाषा में रचित ‘रसकलश’ (1931ई.) एक रीतिग्रंथ है।
हरिऔध को कवि सम्राट कहा जाता है तथा प्रियप्रवास पर इन्हे मंगला प्रसाद पारितोषिक प्रदान किया गया था।