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  • A. छत्तीसगढ़ी का संबंध ग्रियर्सन ने अर्धमागधी से माना है।
  • B. हैहयवंशी तथा गोंड राजाओं के संरक्षण में सामान्य जनता की बोली के रूप में छत्तीसगढ़ी का विकास हुआ।
  • C. छत्तीसगढ़ी भारोपीय परिवार के भारत ईरानी वर्ग की भारतीय आर्यशाखा की बोली है।
  • D. गोंडानी छत्तीसगढ़ी बोली का एक रूप है।
Correct Answer: Option D - छत्तीसगढ़ी बोली के संदर्भ में असत्य कथन है- ‘गोंडानी छत्तीसगढ़ी बोली का एक रूप है।’ जबकि अन्य कथन सत्य हैं जो इस प्रकार हैं- छत्तीसगढ़ी का संबंध ग्रियर्सन ने अद्र्धमागधी से माना है। हैहयवंशी तथा गोंड राजाओं के संरक्षण में सामान्य जनता की बोली के रूप में छत्तीसगढ़ी का विकास हुआ। छत्तीसगढ़ी भारोपीय परिवार के भारत ईरानी वर्ग की भारतीय आर्यशाखा की बोली है। इसका क्षेत्र सरगुजा, कोरिया, विलासपुर, रायगढ़, खैरागढ़, रायपुर, दुर्ग, नंदगाँव, कांकेर आदि हैं।
D. छत्तीसगढ़ी बोली के संदर्भ में असत्य कथन है- ‘गोंडानी छत्तीसगढ़ी बोली का एक रूप है।’ जबकि अन्य कथन सत्य हैं जो इस प्रकार हैं- छत्तीसगढ़ी का संबंध ग्रियर्सन ने अद्र्धमागधी से माना है। हैहयवंशी तथा गोंड राजाओं के संरक्षण में सामान्य जनता की बोली के रूप में छत्तीसगढ़ी का विकास हुआ। छत्तीसगढ़ी भारोपीय परिवार के भारत ईरानी वर्ग की भारतीय आर्यशाखा की बोली है। इसका क्षेत्र सरगुजा, कोरिया, विलासपुर, रायगढ़, खैरागढ़, रायपुर, दुर्ग, नंदगाँव, कांकेर आदि हैं।

Explanations:

छत्तीसगढ़ी बोली के संदर्भ में असत्य कथन है- ‘गोंडानी छत्तीसगढ़ी बोली का एक रूप है।’ जबकि अन्य कथन सत्य हैं जो इस प्रकार हैं- छत्तीसगढ़ी का संबंध ग्रियर्सन ने अद्र्धमागधी से माना है। हैहयवंशी तथा गोंड राजाओं के संरक्षण में सामान्य जनता की बोली के रूप में छत्तीसगढ़ी का विकास हुआ। छत्तीसगढ़ी भारोपीय परिवार के भारत ईरानी वर्ग की भारतीय आर्यशाखा की बोली है। इसका क्षेत्र सरगुजा, कोरिया, विलासपुर, रायगढ़, खैरागढ़, रायपुर, दुर्ग, नंदगाँव, कांकेर आदि हैं।