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Q: .
  • A. D, E, B, A, C
  • B. C, A, E, D, B
  • C. E, A, D, B, C
  • D. A, C, B, E, D
Correct Answer: Option D - अरस्तू के त्रासदी के सिद्धांत के अंगों का सही अनुक्रम इस प्रकार है – (1) कथानक, (2) चरित्र, (3) विचार, (4) पदयोजना, (5) गीत। • अरस्तू यूरोपीय चिन्तन और पाश्चात्य व्यवस्थित विचारधारा के आदि प्रवर्तक, यथार्थवादी, दार्शनिक तथा व्यापक ज्ञान के विश्वकोश थे। • काव्यशास्त्र पर अरस्तू की दो पुस्तवेंâ हैं – रिटोरिक और पोइटिका। • अरस्तू ने काव्य के तीन भेद किये हैं – एक विषादान्त नाटक (ट्रैजेडी), दूसरा प्रसादान्त नाटक (कॉमेडी) और तीसरा महाकाव्य (इपिक)। • विषादान्त नाटक (ट्रैजेडी) के छ: तत्त्व होते हैं – कथावस्तु (प्लाट), चरित्र (कैरेक्टर), भाषाशैली (डिक्शन), विचार (थॉट), प्रदर्शन (स्पेक्टेकिल) और संगीत।
D. अरस्तू के त्रासदी के सिद्धांत के अंगों का सही अनुक्रम इस प्रकार है – (1) कथानक, (2) चरित्र, (3) विचार, (4) पदयोजना, (5) गीत। • अरस्तू यूरोपीय चिन्तन और पाश्चात्य व्यवस्थित विचारधारा के आदि प्रवर्तक, यथार्थवादी, दार्शनिक तथा व्यापक ज्ञान के विश्वकोश थे। • काव्यशास्त्र पर अरस्तू की दो पुस्तवेंâ हैं – रिटोरिक और पोइटिका। • अरस्तू ने काव्य के तीन भेद किये हैं – एक विषादान्त नाटक (ट्रैजेडी), दूसरा प्रसादान्त नाटक (कॉमेडी) और तीसरा महाकाव्य (इपिक)। • विषादान्त नाटक (ट्रैजेडी) के छ: तत्त्व होते हैं – कथावस्तु (प्लाट), चरित्र (कैरेक्टर), भाषाशैली (डिक्शन), विचार (थॉट), प्रदर्शन (स्पेक्टेकिल) और संगीत।

Explanations:

अरस्तू के त्रासदी के सिद्धांत के अंगों का सही अनुक्रम इस प्रकार है – (1) कथानक, (2) चरित्र, (3) विचार, (4) पदयोजना, (5) गीत। • अरस्तू यूरोपीय चिन्तन और पाश्चात्य व्यवस्थित विचारधारा के आदि प्रवर्तक, यथार्थवादी, दार्शनिक तथा व्यापक ज्ञान के विश्वकोश थे। • काव्यशास्त्र पर अरस्तू की दो पुस्तवेंâ हैं – रिटोरिक और पोइटिका। • अरस्तू ने काव्य के तीन भेद किये हैं – एक विषादान्त नाटक (ट्रैजेडी), दूसरा प्रसादान्त नाटक (कॉमेडी) और तीसरा महाकाव्य (इपिक)। • विषादान्त नाटक (ट्रैजेडी) के छ: तत्त्व होते हैं – कथावस्तु (प्लाट), चरित्र (कैरेक्टर), भाषाशैली (डिक्शन), विचार (थॉट), प्रदर्शन (स्पेक्टेकिल) और संगीत।