Correct Answer:
Option D - उपर्युक्त कथन प्रसिद्ध आलोचक नामवर सिंह का है। नामवर सिंह ने ‘परिन्दे’ को हिन्दी की पहली कहानी माना है। उन्होंने लिखा है, ‘परिन्दे’ की लतिका की समस्या स्वतन्त्रता या मुक्ति की समस्या है। अतीत से मुक्ति, स्मृति से मुक्ति, उस चीज से मुक्ति ‘जो हमें चलाये चलती है और अपने रेले में घसीट ले जाती है।’’ ----- सारी कहानी इस मुक्ति की पीड़ा की मार्मिक अभिव्यंजना है।-----मुक्ति का यह क्षण जिसमें मनुष्य स्वयं अपना साक्षी हो जाता है, निर्मल की अनेक कहानियों का आलोक केन्द्र है।’ 8 ‘परिन्दे (1960) निर्मल वर्मा द्वारा रचित कहानी है। जलती झाड़ी (1965 ई.), पिछली गर्मियों में (1968), बीच बहस में (1973 ई.), कव्वे और कालापनी (1983 ई.), सूखा तथा अन्य कहानियाँ (1995 ई.) निर्मल वर्मा द्वारा रचित अन्य महत्वपूर्ण कहानी संग्रह हैं।
D. उपर्युक्त कथन प्रसिद्ध आलोचक नामवर सिंह का है। नामवर सिंह ने ‘परिन्दे’ को हिन्दी की पहली कहानी माना है। उन्होंने लिखा है, ‘परिन्दे’ की लतिका की समस्या स्वतन्त्रता या मुक्ति की समस्या है। अतीत से मुक्ति, स्मृति से मुक्ति, उस चीज से मुक्ति ‘जो हमें चलाये चलती है और अपने रेले में घसीट ले जाती है।’’ ----- सारी कहानी इस मुक्ति की पीड़ा की मार्मिक अभिव्यंजना है।-----मुक्ति का यह क्षण जिसमें मनुष्य स्वयं अपना साक्षी हो जाता है, निर्मल की अनेक कहानियों का आलोक केन्द्र है।’ 8 ‘परिन्दे (1960) निर्मल वर्मा द्वारा रचित कहानी है। जलती झाड़ी (1965 ई.), पिछली गर्मियों में (1968), बीच बहस में (1973 ई.), कव्वे और कालापनी (1983 ई.), सूखा तथा अन्य कहानियाँ (1995 ई.) निर्मल वर्मा द्वारा रचित अन्य महत्वपूर्ण कहानी संग्रह हैं।