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Q: .
  • A. होरी
  • B. धनिया
  • C. गोबर
  • D. सिलिया
Correct Answer: Option B - ‘‘भीख मांगो तुम जो भिखमंगे की जात हो। हम तो मजूर ठहरे, जहाँ काम करेंगे वही चार पैसे पाएंगे’’ गोदान में दातादीन के प्रति उपर्युक्त कथन ‘धनिया’ के हैं। ● धनिया गोदान उपन्यास की प्रमुख स्त्री पात्र है। यह होरी की पत्नी है जो कि उपन्यास का नायक है। ● उपन्यास में होरी और धनिया के पुत्र का नाम गोबर है तथा ‘सोना’ और ‘रूपा’ दो पुत्री हैं। उपन्यास में गोबर की पत्नी का नाम ‘झुनिया’ है। ● गोदान उपन्यास में मातादीन नामक एक पात्र है जो कि सिलिया नामक चमारिन से प्रेम करता है। ● गोदान प्रेमचंद का महत्वपूर्ण उपन्यास है इसका प्रकाशन 1936 ई. में हुआ था। प्रेमचंद के अन्य उपन्याससेवासदन (1918 ई.), प्रेमाश्रम (1922 ई.), रंगभूमि (1925 ई.), कायाकल्प (1926 ई.), निर्मला (1927 ई.), गबन (1931 ई.), कर्मभूमि (1932 ई.) इत्यादि।
B. ‘‘भीख मांगो तुम जो भिखमंगे की जात हो। हम तो मजूर ठहरे, जहाँ काम करेंगे वही चार पैसे पाएंगे’’ गोदान में दातादीन के प्रति उपर्युक्त कथन ‘धनिया’ के हैं। ● धनिया गोदान उपन्यास की प्रमुख स्त्री पात्र है। यह होरी की पत्नी है जो कि उपन्यास का नायक है। ● उपन्यास में होरी और धनिया के पुत्र का नाम गोबर है तथा ‘सोना’ और ‘रूपा’ दो पुत्री हैं। उपन्यास में गोबर की पत्नी का नाम ‘झुनिया’ है। ● गोदान उपन्यास में मातादीन नामक एक पात्र है जो कि सिलिया नामक चमारिन से प्रेम करता है। ● गोदान प्रेमचंद का महत्वपूर्ण उपन्यास है इसका प्रकाशन 1936 ई. में हुआ था। प्रेमचंद के अन्य उपन्याससेवासदन (1918 ई.), प्रेमाश्रम (1922 ई.), रंगभूमि (1925 ई.), कायाकल्प (1926 ई.), निर्मला (1927 ई.), गबन (1931 ई.), कर्मभूमि (1932 ई.) इत्यादि।

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‘‘भीख मांगो तुम जो भिखमंगे की जात हो। हम तो मजूर ठहरे, जहाँ काम करेंगे वही चार पैसे पाएंगे’’ गोदान में दातादीन के प्रति उपर्युक्त कथन ‘धनिया’ के हैं। ● धनिया गोदान उपन्यास की प्रमुख स्त्री पात्र है। यह होरी की पत्नी है जो कि उपन्यास का नायक है। ● उपन्यास में होरी और धनिया के पुत्र का नाम गोबर है तथा ‘सोना’ और ‘रूपा’ दो पुत्री हैं। उपन्यास में गोबर की पत्नी का नाम ‘झुनिया’ है। ● गोदान उपन्यास में मातादीन नामक एक पात्र है जो कि सिलिया नामक चमारिन से प्रेम करता है। ● गोदान प्रेमचंद का महत्वपूर्ण उपन्यास है इसका प्रकाशन 1936 ई. में हुआ था। प्रेमचंद के अन्य उपन्याससेवासदन (1918 ई.), प्रेमाश्रम (1922 ई.), रंगभूमि (1925 ई.), कायाकल्प (1926 ई.), निर्मला (1927 ई.), गबन (1931 ई.), कर्मभूमि (1932 ई.) इत्यादि।