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Q: .
  • A. केवल (B), (C), (E)
  • B. केवल (A), (C), (D)
  • C. केवल (C), (D), (E)
  • D. केवल (B), (C), (E)
Correct Answer: Option A - ‘अंधेर नगर’ नाटक के संदर्भ में असत्य कथन निम्नलिखित हैं- 1. इस नाटक में पाँच दृश्य हैं। 2. द्वितीय अंक स्थान-जंगल है। 3. साँच कहैं तो पनही खावैं, झूठे बहु विधि पदवी पावैं। यह चौथे अंक का गीत है। • भारतेन्दु हरिश्चन्द्र कृत ‘अंधेर नगरी’ (प्रहसन) के संबंध में प्रमुख बिन्दु- 1. यह नाटक 1881 ई. में लिखा गया था और काशी के दशाश्वमे्ध घाट पर उसी दिन अभिनीत भी हुआ। 2. इस नाटक में कुल छ: (6) दृश्य हैं। 3. द्वितीय अंक का स्थान बाजार है। 4. तीसरे दृश्य में ज्ञान और अज्ञान की टकराहट दिखाई पड़ती है। 5. पाँचवे अंक में गोबरधनदास ‘राग काफी’ में गाते हुए आते हैं- ‘साँच कहैं तो पनही खावैं, झूठे बहु विधि पदबी पावैं। भारतेन्दु की प्रमुख कृतियाँ (मौलिक नाटक) - वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति, सत्य हरिश्चन्द्र, श्री चन्द्रावली, विषस्य विषमौषधम्, भारत दुर्दशा, नील देवी, अंधेर नगरी, प्रेम जोगिनी, सती प्रताप।
A. ‘अंधेर नगर’ नाटक के संदर्भ में असत्य कथन निम्नलिखित हैं- 1. इस नाटक में पाँच दृश्य हैं। 2. द्वितीय अंक स्थान-जंगल है। 3. साँच कहैं तो पनही खावैं, झूठे बहु विधि पदवी पावैं। यह चौथे अंक का गीत है। • भारतेन्दु हरिश्चन्द्र कृत ‘अंधेर नगरी’ (प्रहसन) के संबंध में प्रमुख बिन्दु- 1. यह नाटक 1881 ई. में लिखा गया था और काशी के दशाश्वमे्ध घाट पर उसी दिन अभिनीत भी हुआ। 2. इस नाटक में कुल छ: (6) दृश्य हैं। 3. द्वितीय अंक का स्थान बाजार है। 4. तीसरे दृश्य में ज्ञान और अज्ञान की टकराहट दिखाई पड़ती है। 5. पाँचवे अंक में गोबरधनदास ‘राग काफी’ में गाते हुए आते हैं- ‘साँच कहैं तो पनही खावैं, झूठे बहु विधि पदबी पावैं। भारतेन्दु की प्रमुख कृतियाँ (मौलिक नाटक) - वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति, सत्य हरिश्चन्द्र, श्री चन्द्रावली, विषस्य विषमौषधम्, भारत दुर्दशा, नील देवी, अंधेर नगरी, प्रेम जोगिनी, सती प्रताप।

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‘अंधेर नगर’ नाटक के संदर्भ में असत्य कथन निम्नलिखित हैं- 1. इस नाटक में पाँच दृश्य हैं। 2. द्वितीय अंक स्थान-जंगल है। 3. साँच कहैं तो पनही खावैं, झूठे बहु विधि पदवी पावैं। यह चौथे अंक का गीत है। • भारतेन्दु हरिश्चन्द्र कृत ‘अंधेर नगरी’ (प्रहसन) के संबंध में प्रमुख बिन्दु- 1. यह नाटक 1881 ई. में लिखा गया था और काशी के दशाश्वमे्ध घाट पर उसी दिन अभिनीत भी हुआ। 2. इस नाटक में कुल छ: (6) दृश्य हैं। 3. द्वितीय अंक का स्थान बाजार है। 4. तीसरे दृश्य में ज्ञान और अज्ञान की टकराहट दिखाई पड़ती है। 5. पाँचवे अंक में गोबरधनदास ‘राग काफी’ में गाते हुए आते हैं- ‘साँच कहैं तो पनही खावैं, झूठे बहु विधि पदबी पावैं। भारतेन्दु की प्रमुख कृतियाँ (मौलिक नाटक) - वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति, सत्य हरिश्चन्द्र, श्री चन्द्रावली, विषस्य विषमौषधम्, भारत दुर्दशा, नील देवी, अंधेर नगरी, प्रेम जोगिनी, सती प्रताप।