Explanations:
‘‘दृश्य बिम्ब आकार वाले होते हैं। श्रव्य बिम्ब का ग्रहण कर्णेन्द्रिय के द्वारा होता है।’ बिम्ब के सन्दर्भ में दोनों कथन सही हैं। ⇒ जब किसी पदार्थ को चित्रबद्ध करके एक मूर्त रूप दिया जाता है तो उसे बिम्ब कहते है। कवि टी. ई. ह्यूम को बिंबवाद का प्रवर्तक माना जाता है किन्तु आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने फ्लिंट को इसका प्रवर्तक माना है। ⇒ काव्य में बिंब का मुख्य काम सम्प्रेषण का है बिम्ब काव्य में प्रयुक्त दृश्य को स्पष्ट करता है तथा कवि की अनुभूति में एक तीव्रता पैदा करता है। ⇒ हिन्दी समीक्षा में ‘बिम्ब’ शब्द का सबसे पहले प्रयोग रामचन्द्र शुक्ल ने अपने निबन्ध ‘भाव या मनोविकार’ में 1915 में किया। काव्य में बिंब की चर्चा करते हुए रामचन्द्र शुक्ल ने रूपविधान को स्पष्ट किया है। शुक्ल जी के अनुसार रूपविधान के तीन प्रकार हैं- (1) प्रत्यक्ष रूपविधान (2) स्मृत रूपविधान (3) कल्पित रूपविधान। कल्पित रूपविधान को ही काव्य के लिए आवश्यक माना जाता है। यह जरूर है कि प्रत्यक्ष और स्मृत रूपविधान कल्पित रूपविधान के आधार हैं।