Correct Answer:
Option B - मनोवैज्ञानिकों ने मनोवैज्ञानिक लक्षणों के आधार पर व्यक्तित्व का वर्गीकरण किया है। मनोविश्लेषणवादी युंग ने व्यक्तित्व को दो भागों में बाँटा है-
(1) अन्तर्मुखी (2) बहिर्मुखी तथा दोनों के मिश्रित उभयोमुखी।
1. अन्तर्मुखी व्यक्तित्व- ऐसे व्यक्तित्व का व्यक्ति चिन्तनशील होता है तथा अपनी ही ओर केन्द्रित रहता है। इस व्यक्तित्व के लक्षण, स्वभाव, आदतें, अभिवृत्तियाँ आदि बाह्य रूप में प्रकट नहीं होते हैं। इसलिए, इनको अन्तर्मुखी कहा जाता है।
2. बहिर्मुखी व्यक्तिव- ऐसे व्यक्तित्व वाले व्यक्ति की रूचि बाह्य जगत में होती है। वे अपने विचारों और भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करते हैं। वे संसार के भौतिक और सामाजिक लक्ष्यों में विशेष रूचि रखते हैं।
3. उभयमुखी व्यक्तित्व- कुछ ऐसे भी व्यक्ति होते हैं, जो दोनों का सम्मिश्रण होते हैं, उन्हें उभयोमुखी या विकासोन्मुखी कहते हैं।
अत: बाल्यावस्था में बहिर्मुखी व्यक्तित्व होता है।
B. मनोवैज्ञानिकों ने मनोवैज्ञानिक लक्षणों के आधार पर व्यक्तित्व का वर्गीकरण किया है। मनोविश्लेषणवादी युंग ने व्यक्तित्व को दो भागों में बाँटा है-
(1) अन्तर्मुखी (2) बहिर्मुखी तथा दोनों के मिश्रित उभयोमुखी।
1. अन्तर्मुखी व्यक्तित्व- ऐसे व्यक्तित्व का व्यक्ति चिन्तनशील होता है तथा अपनी ही ओर केन्द्रित रहता है। इस व्यक्तित्व के लक्षण, स्वभाव, आदतें, अभिवृत्तियाँ आदि बाह्य रूप में प्रकट नहीं होते हैं। इसलिए, इनको अन्तर्मुखी कहा जाता है।
2. बहिर्मुखी व्यक्तिव- ऐसे व्यक्तित्व वाले व्यक्ति की रूचि बाह्य जगत में होती है। वे अपने विचारों और भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करते हैं। वे संसार के भौतिक और सामाजिक लक्ष्यों में विशेष रूचि रखते हैं।
3. उभयमुखी व्यक्तित्व- कुछ ऐसे भी व्यक्ति होते हैं, जो दोनों का सम्मिश्रण होते हैं, उन्हें उभयोमुखी या विकासोन्मुखी कहते हैं।
अत: बाल्यावस्था में बहिर्मुखी व्यक्तित्व होता है।