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  • A. मीराबाई
  • B. मलिक मुहम्मद जायसी
  • C. तुलसीदास
  • D. सूरदास
Correct Answer: Option B - ‘पिउ सौ कहेउ संदेसड़ा, हे भौंरा! हे काग! मलिक मुहम्मद जायसी द्वारा रचित पद्मावत की काव्य-पंक्ति है। जायसी प्रसिद्ध सूफी फकीर शेख मोहिदी (मुहीउद्दीन) के शिष्य थे और शेरशाह के समकालीन कवि थे तथा अमेठी के निकट जायस में रहते थे। पद्मावत, अखरावट, आखिरी कलाम, चित्ररेखा, कहरानामा, मसलानामा, कन्हावत जायसी द्वारा रचित महत्वपूर्ण काव्य-कृत्तियाँ हैं। जायसी कृत ‘पद्मावत’ (1540 ई.) में कुल 57 खण्ड है और इनका प्रिय अलंकार ‘उत्प्रेक्षा’ है।
B. ‘पिउ सौ कहेउ संदेसड़ा, हे भौंरा! हे काग! मलिक मुहम्मद जायसी द्वारा रचित पद्मावत की काव्य-पंक्ति है। जायसी प्रसिद्ध सूफी फकीर शेख मोहिदी (मुहीउद्दीन) के शिष्य थे और शेरशाह के समकालीन कवि थे तथा अमेठी के निकट जायस में रहते थे। पद्मावत, अखरावट, आखिरी कलाम, चित्ररेखा, कहरानामा, मसलानामा, कन्हावत जायसी द्वारा रचित महत्वपूर्ण काव्य-कृत्तियाँ हैं। जायसी कृत ‘पद्मावत’ (1540 ई.) में कुल 57 खण्ड है और इनका प्रिय अलंकार ‘उत्प्रेक्षा’ है।

Explanations:

‘पिउ सौ कहेउ संदेसड़ा, हे भौंरा! हे काग! मलिक मुहम्मद जायसी द्वारा रचित पद्मावत की काव्य-पंक्ति है। जायसी प्रसिद्ध सूफी फकीर शेख मोहिदी (मुहीउद्दीन) के शिष्य थे और शेरशाह के समकालीन कवि थे तथा अमेठी के निकट जायस में रहते थे। पद्मावत, अखरावट, आखिरी कलाम, चित्ररेखा, कहरानामा, मसलानामा, कन्हावत जायसी द्वारा रचित महत्वपूर्ण काव्य-कृत्तियाँ हैं। जायसी कृत ‘पद्मावत’ (1540 ई.) में कुल 57 खण्ड है और इनका प्रिय अलंकार ‘उत्प्रेक्षा’ है।