Correct Answer:
Option C - उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार धर्म की प्राप्ति और आचरण के विकास के लिए इनमें से कर्म के प्रति समर्पण होना अनिवार्य है। तथा आचरण के विकास के लिए जितने भी कर्म निर्धारित किए गए हैं उन सभी को संघटनकर्ता धर्म का अंग मानना चाहिए।
C. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार धर्म की प्राप्ति और आचरण के विकास के लिए इनमें से कर्म के प्रति समर्पण होना अनिवार्य है। तथा आचरण के विकास के लिए जितने भी कर्म निर्धारित किए गए हैं उन सभी को संघटनकर्ता धर्म का अंग मानना चाहिए।