Correct Answer:
Option D - इन सब की जिन्दगी चौपट करने का जिम्मेदार मैं हूँ। फिर भी मैं इस घर से चिपका हूँ क्योंकि अन्दर से मैं आराम-तलब हूँ, घरघुसरा हूँ, मेरी हड्डियों में जंग लगा है। यह कथन आधे-अधूरे नाटक से लिया गया है। आधे-अधूरे नाटक के लेखक मोहन राकेश है। यह नाटक आधुनिक युग के आधे-अधूरे समाज, परिवार, व्यक्ति, संबंधों आदि के मूल बिन्दूओं को दर्शाता है। इसमेंं स्त्री पुरुष संबंधों के तनाव और विखराव को रेखांकित किया गया है। इस नाटक में तीन स्त्रीपात्र तथा पाँच पुरुष पात्र है। मोहन राकेश द्वारा रचित अन्य नाटक हैं- आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, पैरो तले जमीन (अधूरा)।
D. इन सब की जिन्दगी चौपट करने का जिम्मेदार मैं हूँ। फिर भी मैं इस घर से चिपका हूँ क्योंकि अन्दर से मैं आराम-तलब हूँ, घरघुसरा हूँ, मेरी हड्डियों में जंग लगा है। यह कथन आधे-अधूरे नाटक से लिया गया है। आधे-अधूरे नाटक के लेखक मोहन राकेश है। यह नाटक आधुनिक युग के आधे-अधूरे समाज, परिवार, व्यक्ति, संबंधों आदि के मूल बिन्दूओं को दर्शाता है। इसमेंं स्त्री पुरुष संबंधों के तनाव और विखराव को रेखांकित किया गया है। इस नाटक में तीन स्त्रीपात्र तथा पाँच पुरुष पात्र है। मोहन राकेश द्वारा रचित अन्य नाटक हैं- आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, पैरो तले जमीन (अधूरा)।