Correct Answer:
Option A - गढ़वाल क्षेत्र में बोली जाने वाली गढ़वाली बोली की उत्पत्ति शुद्ध शौरसेनी से हुयी है। इसकी शब्द रचना खड़ी बोली हिन्दी पर आधारित है। यह देवनागरी में लिखी जाती है। कुमाऊंनी कुमाऊं क्षेत्र की बोली है। इस पर अवधी बोली का प्रभाव अधिक पाया जाता है। इसकी उपबोलियों में खसपर्जिया, दनपुरिया, पछाई, कुमाई, सीराली आदि हैं। भोटिया बोली उत्तरांचल के तिब्बत तथा नेपाल की सीमा से लगे सीमावर्ती क्षेत्रों में यह बोली जाती है। जौनसारी देहरादून के जौनसार बाबर क्षेत्र तथा गढ़वाल क्षेत्र के ऊंचाई वाले स्थानों पर जौनसारी बोली का प्रचलन है।
A. गढ़वाल क्षेत्र में बोली जाने वाली गढ़वाली बोली की उत्पत्ति शुद्ध शौरसेनी से हुयी है। इसकी शब्द रचना खड़ी बोली हिन्दी पर आधारित है। यह देवनागरी में लिखी जाती है। कुमाऊंनी कुमाऊं क्षेत्र की बोली है। इस पर अवधी बोली का प्रभाव अधिक पाया जाता है। इसकी उपबोलियों में खसपर्जिया, दनपुरिया, पछाई, कुमाई, सीराली आदि हैं। भोटिया बोली उत्तरांचल के तिब्बत तथा नेपाल की सीमा से लगे सीमावर्ती क्षेत्रों में यह बोली जाती है। जौनसारी देहरादून के जौनसार बाबर क्षेत्र तथा गढ़वाल क्षेत्र के ऊंचाई वाले स्थानों पर जौनसारी बोली का प्रचलन है।