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Q: .
  • A. मदनमोहन
  • B. शिंभूदयाल
  • C. चुन्नीलाल
  • D. पुरुषोत्तमदास
Correct Answer: Option D - राजनीति मैं कहा है ‘‘राजा सुख भोगहि सदा मंत्री करहि सम्हार।।’’ राजकाज बिगेर कछू तो मंत्री सिर भार।।’’ परीक्षा गुरु उपन्यास में यह कथन पुरुषोत्तमदास का है। • लाला श्रीनिवासदास कृत ‘परीक्षा गुरू (1882ई.) उपन्यास हिंदी का प्रथम उपन्यास है। • आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने परीक्षा गुरु को अंग्रेजी के ढंग का हिंदी का पहला मौलिक उपन्यास माना है। • यह उपन्यास 41 छोटे-छोटे प्रकरणों में विभक्त है। प्रमुख पात्र- लाल मदन मोहन, लाला ब्रजकिशोर, प्रियम्बदा, मुंशी चुन्नी लाल, मास्टर शिम्भूदयाल, बाबू लाल, पुरूषोत्तम, हकीम अहमद हुसैन।
D. राजनीति मैं कहा है ‘‘राजा सुख भोगहि सदा मंत्री करहि सम्हार।।’’ राजकाज बिगेर कछू तो मंत्री सिर भार।।’’ परीक्षा गुरु उपन्यास में यह कथन पुरुषोत्तमदास का है। • लाला श्रीनिवासदास कृत ‘परीक्षा गुरू (1882ई.) उपन्यास हिंदी का प्रथम उपन्यास है। • आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने परीक्षा गुरु को अंग्रेजी के ढंग का हिंदी का पहला मौलिक उपन्यास माना है। • यह उपन्यास 41 छोटे-छोटे प्रकरणों में विभक्त है। प्रमुख पात्र- लाल मदन मोहन, लाला ब्रजकिशोर, प्रियम्बदा, मुंशी चुन्नी लाल, मास्टर शिम्भूदयाल, बाबू लाल, पुरूषोत्तम, हकीम अहमद हुसैन।

Explanations:

राजनीति मैं कहा है ‘‘राजा सुख भोगहि सदा मंत्री करहि सम्हार।।’’ राजकाज बिगेर कछू तो मंत्री सिर भार।।’’ परीक्षा गुरु उपन्यास में यह कथन पुरुषोत्तमदास का है। • लाला श्रीनिवासदास कृत ‘परीक्षा गुरू (1882ई.) उपन्यास हिंदी का प्रथम उपन्यास है। • आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने परीक्षा गुरु को अंग्रेजी के ढंग का हिंदी का पहला मौलिक उपन्यास माना है। • यह उपन्यास 41 छोटे-छोटे प्रकरणों में विभक्त है। प्रमुख पात्र- लाल मदन मोहन, लाला ब्रजकिशोर, प्रियम्बदा, मुंशी चुन्नी लाल, मास्टर शिम्भूदयाल, बाबू लाल, पुरूषोत्तम, हकीम अहमद हुसैन।