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Q: .
  • A. केवल (C), (D), (E)
  • B. केवल (A), (C), (D)
  • C. केवल (B), (D), (E)
  • D. केवल (B), (C), (E)
Correct Answer: Option C - सत्य के प्रचार से जैसे जीवन के अन्य मूल्य नष्ट होते हैं, वैसे ही, एकता और प्रेम भी। • अचरज यह है कि ऐसा करने की अनुमति उन्हें खुद पोप ने नहीं दी थी। • कलकत्ते के मदरसे और काशी के संस्कृत कॉलेज के बाद कम्पनी-सरकार ने कई वर्ष तक शिक्षा की दिशा में तीसरा कदम उठाया। उपर्युक्त कथनों का संबंध संस्कृति के चार अध्याय से नहीं हैं। • संस्कृति के चार अध्याय से संबंधित कथन- • राजनीति के धरातल पर बँटे हुए लोग धर्म के धरातल पर एक होने लगे। • सूफियों और कलंदरों के प्रभाव से भारत में इस्लाम का रूप बदल गया। • संस्कृति के चार अध्याय (1956ई.) रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना है। जो चार अध्याय में विभक्त है। 1. प्रथम अध्याय में 3 प्रकरण है। 2. द्वितीय अध्याय में 7 प्रकरण है। 3. तृतीय अध्याय में 12 प्रकरण है। 4. चतुर्थ अध्याय में 17 प्रकरण है (कुल मिलाकर 39 प्रकरण है)। • इस पुस्तक की प्रस्तावना नेहरु द्वारा लिखा गया है। • यह भारतीय संस्कृति का सर्वेक्षण है जिसके लिए ‘दिनकर’ जी को 1959 ई. में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था
C. सत्य के प्रचार से जैसे जीवन के अन्य मूल्य नष्ट होते हैं, वैसे ही, एकता और प्रेम भी। • अचरज यह है कि ऐसा करने की अनुमति उन्हें खुद पोप ने नहीं दी थी। • कलकत्ते के मदरसे और काशी के संस्कृत कॉलेज के बाद कम्पनी-सरकार ने कई वर्ष तक शिक्षा की दिशा में तीसरा कदम उठाया। उपर्युक्त कथनों का संबंध संस्कृति के चार अध्याय से नहीं हैं। • संस्कृति के चार अध्याय से संबंधित कथन- • राजनीति के धरातल पर बँटे हुए लोग धर्म के धरातल पर एक होने लगे। • सूफियों और कलंदरों के प्रभाव से भारत में इस्लाम का रूप बदल गया। • संस्कृति के चार अध्याय (1956ई.) रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना है। जो चार अध्याय में विभक्त है। 1. प्रथम अध्याय में 3 प्रकरण है। 2. द्वितीय अध्याय में 7 प्रकरण है। 3. तृतीय अध्याय में 12 प्रकरण है। 4. चतुर्थ अध्याय में 17 प्रकरण है (कुल मिलाकर 39 प्रकरण है)। • इस पुस्तक की प्रस्तावना नेहरु द्वारा लिखा गया है। • यह भारतीय संस्कृति का सर्वेक्षण है जिसके लिए ‘दिनकर’ जी को 1959 ई. में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था

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सत्य के प्रचार से जैसे जीवन के अन्य मूल्य नष्ट होते हैं, वैसे ही, एकता और प्रेम भी। • अचरज यह है कि ऐसा करने की अनुमति उन्हें खुद पोप ने नहीं दी थी। • कलकत्ते के मदरसे और काशी के संस्कृत कॉलेज के बाद कम्पनी-सरकार ने कई वर्ष तक शिक्षा की दिशा में तीसरा कदम उठाया। उपर्युक्त कथनों का संबंध संस्कृति के चार अध्याय से नहीं हैं। • संस्कृति के चार अध्याय से संबंधित कथन- • राजनीति के धरातल पर बँटे हुए लोग धर्म के धरातल पर एक होने लगे। • सूफियों और कलंदरों के प्रभाव से भारत में इस्लाम का रूप बदल गया। • संस्कृति के चार अध्याय (1956ई.) रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना है। जो चार अध्याय में विभक्त है। 1. प्रथम अध्याय में 3 प्रकरण है। 2. द्वितीय अध्याय में 7 प्रकरण है। 3. तृतीय अध्याय में 12 प्रकरण है। 4. चतुर्थ अध्याय में 17 प्रकरण है (कुल मिलाकर 39 प्रकरण है)। • इस पुस्तक की प्रस्तावना नेहरु द्वारा लिखा गया है। • यह भारतीय संस्कृति का सर्वेक्षण है जिसके लिए ‘दिनकर’ जी को 1959 ई. में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था