Correct Answer:
Option D - ‘‘भारत समग्र विश्व का है और सम्पूर्ण वसुंधरा इसके प्रेमपाश में आबद्ध है। अनादि काल से ज्ञान की मानवता ज्योति यह विकीर्ण कर रहा है।’’ यह कथन धातुसेन का है। ‘धातुसेन’ जयशंकर प्रसाद द्वारा सन् 1928 ई. में रचित नाटक स्कंदगुप्त का पात्र है। इस नाटक में पाँच अंक और 33 दृश्य हैं। नाटक में धातुसेन, कुमारदास के रूप में भी जाना जाता है यह नाटक गुप्त साम्राज्य के पतन और स्कंदगुप्त के संघर्षों को दर्शाता है। मातृगुप्त तथा प्रख्यातकीर्ति भी स्कन्दगुप्त नाटक के ही पात्र हैं।
D. ‘‘भारत समग्र विश्व का है और सम्पूर्ण वसुंधरा इसके प्रेमपाश में आबद्ध है। अनादि काल से ज्ञान की मानवता ज्योति यह विकीर्ण कर रहा है।’’ यह कथन धातुसेन का है। ‘धातुसेन’ जयशंकर प्रसाद द्वारा सन् 1928 ई. में रचित नाटक स्कंदगुप्त का पात्र है। इस नाटक में पाँच अंक और 33 दृश्य हैं। नाटक में धातुसेन, कुमारदास के रूप में भी जाना जाता है यह नाटक गुप्त साम्राज्य के पतन और स्कंदगुप्त के संघर्षों को दर्शाता है। मातृगुप्त तथा प्रख्यातकीर्ति भी स्कन्दगुप्त नाटक के ही पात्र हैं।