निर्देश (175-180) : निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए । कुछ ऐसे पूरब के गाँव की हवा चली, खपरैलों की दुनिया आँख खोलने लगी। जमे हुए धुएँ-सी पहाड़ी है दूर की, काजल की रेख-सी कतार है खजूर की सोने का कलश लिए उषा चली आ रही, माथे पर दमक रही आभा सिंदूर की। पहाड़ी को जमे हुए धुएँ-सी क्यों कहा गया होगा?
For RCC construction the maximum size of coarse aggregate is limited to
If a dairy mixes cow's milk which contains 10% fat with buffalo's milk which contains 20% fat, then the resulting mixture has fat (120/7)% of fat. What ratio was the cow's milk mixed with buffalo's milk? कोई डेयरी गाय का दूध जिसमें वसा (फैट) का प्रतिशत 10% है, को भैंस के दूध के साथ मिलाती है जिसमें 20% वसा है तो परिणामी मिश्रण में वसा, वसा का (120/7)% होता है। गाय का दूध किस अनुपात में भैंस के दूध के साथ मिलाया गया?
तुलसीदास रचित ‘विनयपत्रिका’ में पदों की कुल संख्या है।
A student takes 1.5 hours from home to school at a speed of 5 km/h. By what percent should he increase his speed to reduce the time by 20% and cover the same distance from school to home?
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Which one of the following is not an economic infrastructure?/निम्नलिखित में से कौन सा एक आर्थिक अवस्थापना नहीं है?
एक 150 मीटर लम्बी रेलगाड़ी 54 कि.मी/घंटे की रफ्तार से चल रही है। रेलगाड़ी द्वारा एक खंभे को पार करने में लगने वाला समय ज्ञात करें।
Article 17 of the Indian Constitution enforces the:
निर्देश–प्रश्न 90-95 पर्यन्तं प्रश्ना: प्रस्तुतगद्यांशमाधारीकृत्य समाधेया:– कस्यापि राष्ट्रस्य कृते स्वराज्यसदृशमन्यत् भूतं प्रभूतं वैभवं नास्ति। एतेन ध्वन्यते प्रस्फुटं यत् प्रजातन्त्रं शासनमपि तदेवोत्कृष्टं यत्स्वराज्यसंवलितं भवेत्। एष प्रजातन्त्रप्रसङ्ग: अन्यत्रापि संस्कृतसाहित्ये दरीदृश्यते। प्रायश: वर्षाणां सहस्रद्वयी व्यतीयाय यदा राजनीतिनिपुण: कौटिल्यापरनामधेय: आचार्यचाणक्य: बभूव। तेन कूटनीति धुरंधरेण एकायत्तं नन्दवंशप्रशासनमुच्छिद्य मौर्यकुलभूषणं चन्द्रगुप्तं राज्यसिंहासने प्रतिष्ठापयामास। महान् राजनीतिज्ञ: कौटिल्य: चन्द्रगुप्तस्य कृते साम्राज्यधुरं निर्वोढुमर्थशास्त्रविधं लोकविश्रुतं राजनीतितन्त्रं प्रणिनाय। यत्र प्रजातन्त्रपद्धतिमेवावलम्ब्य राज्यतन्त्रं सञ्चायितव्यमिति सर्वं सुनिपुणं प्रतिपादितम्। शास्त्रमिदं राज्यचक्रसञ्चालनौपयिकान् अर्थान् अनुबध्नाति राजाप्रजाऽनुबन्धिन: समस्तानप्यावश्यकान् विषयान् संस्पृशति। ग्रन्थरत्नमिदमवलोक्य पाश्चात्य अपि नीतिविशारदा विस्मिता भवन्ति यद्भारतेऽपि ईदृशा नीतिनिपुणा: पण्डिता: समजायन्त:। आचार्य चाणक्यस्य अपरं नाम किमासीत्?
Explanations:
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