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  • A. कर्मकारक
  • B. करणकारक
  • C. सम्प्रदानकारक
  • D. अपादानकारक
Correct Answer: Option D - ‘वृक्षात् पत्रं पतति’ में रेखांकित पद वृक्षात् में अपादान कारक है। अपाय विश्लेष (अलग होना) को कहते हैं। उसमें जो ध्रुव या अवधिभूत होता है, वह अपादान कहलाता है तथा ‘अपादाने पञ्चमी’ सूत्र के अनुसार अपादान में पञ्चमी विभक्ति होती है।
D. ‘वृक्षात् पत्रं पतति’ में रेखांकित पद वृक्षात् में अपादान कारक है। अपाय विश्लेष (अलग होना) को कहते हैं। उसमें जो ध्रुव या अवधिभूत होता है, वह अपादान कहलाता है तथा ‘अपादाने पञ्चमी’ सूत्र के अनुसार अपादान में पञ्चमी विभक्ति होती है।

Explanations:

‘वृक्षात् पत्रं पतति’ में रेखांकित पद वृक्षात् में अपादान कारक है। अपाय विश्लेष (अलग होना) को कहते हैं। उसमें जो ध्रुव या अवधिभूत होता है, वह अपादान कहलाता है तथा ‘अपादाने पञ्चमी’ सूत्र के अनुसार अपादान में पञ्चमी विभक्ति होती है।