Correct Answer:
Option C - ‘‘मैं तो चाहता हूँ सबको अपने-अपने अधिकार सौंपकर अपने अधिकारों को शून्य में बदल दूँ।’’ उपर्युक्त कथन ‘महाभोज’ नाटक का है। यह मन्नू भण्डारी का नाटक है। इसका प्रकाशन वर्ष 1982 ई. है। यह इनके ही उपन्यास महाभोज का नाट्य रूपान्तर है। इनका एक अन्य नाटक ‘बिना दीवारों के घर’ है। इसका प्रकाशन वर्ष 1965 ई. है। ‘एक और द्रोणाचार्य’ शंकरशेष का नाटक ‘आधे अधूरे’ मोहन राकेश का नाटक तथा ‘अंजो दीदी’ उपेन्द्रनाथ अश्क का नाटक है।
C. ‘‘मैं तो चाहता हूँ सबको अपने-अपने अधिकार सौंपकर अपने अधिकारों को शून्य में बदल दूँ।’’ उपर्युक्त कथन ‘महाभोज’ नाटक का है। यह मन्नू भण्डारी का नाटक है। इसका प्रकाशन वर्ष 1982 ई. है। यह इनके ही उपन्यास महाभोज का नाट्य रूपान्तर है। इनका एक अन्य नाटक ‘बिना दीवारों के घर’ है। इसका प्रकाशन वर्ष 1965 ई. है। ‘एक और द्रोणाचार्य’ शंकरशेष का नाटक ‘आधे अधूरे’ मोहन राकेश का नाटक तथा ‘अंजो दीदी’ उपेन्द्रनाथ अश्क का नाटक है।