Correct Answer:
Option A - मोहनजोदड़ो एवं अन्य स्थलों पर पाए गए सूती वस्त्रों के रेशों से इस बात का पता चलता है कि कपास की खेती भी की जाती थी। इस सभ्यता के परिपक्वता के चरण से कम से कम दो हजार वर्ष पूर्व के मेहरगढ़ पुरास्थल पर कपास के अवशेष प्राप्त हुए। सर्वप्रथम यहीं के निवासियों ने कपास की खेती प्रारम्भ किया था। ऐतिहासिक काल में मेसोपोटामिया में कपास के लिए ‘सिन्धु’ शब्द का प्रयोग किया जाने लगा तथा यूनानियों ने इसे सिन्डन कहा जो सिन्धु का ही रूपान्तर है। हड़प्पाई लोगों को कुल नौ फसलें ज्ञात थीं– गेंहूँ की तीन किस्में, जौ की दो किस्में, कपास, खजूर, तरबूज, मटर, राई, सरसों और तिल। सिन्धु सभ्यता के लोग अनाज को रखने के लिए मिट्टी के बने बड़े बर्तनों का प्रयोग करते थे। पश्चिम बंगाल में सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमाण नहीं मिलते हैं, यद्यपि घोड़े का प्रमाण प्राप्त होता है परन्तु घोड़े को बड़े पैमाने पर पालने के प्रमाण नहीं मिलते हैं। अत: विकल्प (a) सही उत्तर है।
A. मोहनजोदड़ो एवं अन्य स्थलों पर पाए गए सूती वस्त्रों के रेशों से इस बात का पता चलता है कि कपास की खेती भी की जाती थी। इस सभ्यता के परिपक्वता के चरण से कम से कम दो हजार वर्ष पूर्व के मेहरगढ़ पुरास्थल पर कपास के अवशेष प्राप्त हुए। सर्वप्रथम यहीं के निवासियों ने कपास की खेती प्रारम्भ किया था। ऐतिहासिक काल में मेसोपोटामिया में कपास के लिए ‘सिन्धु’ शब्द का प्रयोग किया जाने लगा तथा यूनानियों ने इसे सिन्डन कहा जो सिन्धु का ही रूपान्तर है। हड़प्पाई लोगों को कुल नौ फसलें ज्ञात थीं– गेंहूँ की तीन किस्में, जौ की दो किस्में, कपास, खजूर, तरबूज, मटर, राई, सरसों और तिल। सिन्धु सभ्यता के लोग अनाज को रखने के लिए मिट्टी के बने बड़े बर्तनों का प्रयोग करते थे। पश्चिम बंगाल में सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमाण नहीं मिलते हैं, यद्यपि घोड़े का प्रमाण प्राप्त होता है परन्तु घोड़े को बड़े पैमाने पर पालने के प्रमाण नहीं मिलते हैं। अत: विकल्प (a) सही उत्तर है।