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  • A. मृत्युदंड
  • B. ऩजरबंद
  • C. आजीवन कारावास
  • D. देश निकाला
Correct Answer: Option C - ‘सभी संथालों को दामुल हौज हो गया है’- ‘मैला आंचल’ की पंक्ति के आधार पर दामुल ‘हौज’ शब्द का अर्थ ‘आजीवन कारावास’ है। • ‘मैला आंचल’ फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा रचित आँचलिक उपन्यास है। इसका प्रकाशन 1954 ई. में हुआ था। ‘मैला आँचल’ में बिहार के मिथिला अंचल के गाँव मेरीगंज को आधार बनाकर उस अंचल के जनसामान्य के सुख-दुख, रहन-सहन, संस्कृति, संघर्ष और लोक जीवन को अत्यन्त कुशलता व कलात्मकता से प्रस्तुत किया गया है। इस उपन्यास में जातिवाद, अफसरशाही, अवसरवादी, राजनीति, मठों और आश्रमों का पाखंड भी दर्शाया गया है। रेणु के प्रमुख उपन्यास - मैला आँचल (1954 ई.), परती परिकथा (1957 ई.), दीर्घतपा (1963 ई.), जूलूस (1965 ई.), कितने चौराहे (1966 ई.), पल्टू बाबू रोड (1979 ई.) राम रतनराय (1971) अपूर्ण।
C. ‘सभी संथालों को दामुल हौज हो गया है’- ‘मैला आंचल’ की पंक्ति के आधार पर दामुल ‘हौज’ शब्द का अर्थ ‘आजीवन कारावास’ है। • ‘मैला आंचल’ फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा रचित आँचलिक उपन्यास है। इसका प्रकाशन 1954 ई. में हुआ था। ‘मैला आँचल’ में बिहार के मिथिला अंचल के गाँव मेरीगंज को आधार बनाकर उस अंचल के जनसामान्य के सुख-दुख, रहन-सहन, संस्कृति, संघर्ष और लोक जीवन को अत्यन्त कुशलता व कलात्मकता से प्रस्तुत किया गया है। इस उपन्यास में जातिवाद, अफसरशाही, अवसरवादी, राजनीति, मठों और आश्रमों का पाखंड भी दर्शाया गया है। रेणु के प्रमुख उपन्यास - मैला आँचल (1954 ई.), परती परिकथा (1957 ई.), दीर्घतपा (1963 ई.), जूलूस (1965 ई.), कितने चौराहे (1966 ई.), पल्टू बाबू रोड (1979 ई.) राम रतनराय (1971) अपूर्ण।

Explanations:

‘सभी संथालों को दामुल हौज हो गया है’- ‘मैला आंचल’ की पंक्ति के आधार पर दामुल ‘हौज’ शब्द का अर्थ ‘आजीवन कारावास’ है। • ‘मैला आंचल’ फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा रचित आँचलिक उपन्यास है। इसका प्रकाशन 1954 ई. में हुआ था। ‘मैला आँचल’ में बिहार के मिथिला अंचल के गाँव मेरीगंज को आधार बनाकर उस अंचल के जनसामान्य के सुख-दुख, रहन-सहन, संस्कृति, संघर्ष और लोक जीवन को अत्यन्त कुशलता व कलात्मकता से प्रस्तुत किया गया है। इस उपन्यास में जातिवाद, अफसरशाही, अवसरवादी, राजनीति, मठों और आश्रमों का पाखंड भी दर्शाया गया है। रेणु के प्रमुख उपन्यास - मैला आँचल (1954 ई.), परती परिकथा (1957 ई.), दीर्घतपा (1963 ई.), जूलूस (1965 ई.), कितने चौराहे (1966 ई.), पल्टू बाबू रोड (1979 ई.) राम रतनराय (1971) अपूर्ण।