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  • A. 4 3 1 2
  • B. 4 2 1 3
  • C. 2 3 4 1
  • D. 3 4 1 2
Correct Answer: Option B - गुप्तकालीन देवगढ़ का दशावतार मंदिर उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में देवगढ़ नामक स्थान पर स्थित है। चन्देल शासकों द्वारा खजुराहो में बनवाये गये 25 मंदिर आज भी विद्यमान हैं। इनका निर्माण ग्रेनाइट तथा लाल बलुआ पत्थरों से किया गया है। ये शैव, वैष्णव तथा जैन धर्मों से संबंधित है। प्रत्येक मंदिर में मण्डप, अर्धमण्डप तथा अन्तराल मिलते हैं। प्रवेश द्वार को मकरतोरण से सजाया गया है। खजुराहो के मंदिरों में कन्दरिया महादेव मंदिर सर्वश्रेष्ठ है। इसके गर्भगृह में संगमरमर का शिवलिंग स्थापित है। चालुक्य मंदिरों के उत्कृष्ट नमूने बादामी, एहोल, पत्तडकल से प्राप्त होते हैं। बादामी में पाषाण को काटकर चार स्तम्भयुक्त मण्डप बनाये गये हैं। इनसे तीन हिन्दू तथा एक जैन धर्म से संबंधित है। प्रत्येक में स्तम्भयुक्त बरामदा, मेहराब युक्त हाल, एक छोटा वर्गाकार गर्भगृह है। पल्लव नरेश नरसिंह वर्मन ने वातापी को जीतकर `वातापीकोण्ड' की उपाधि धारण की थी। पल्लव काल में पनामालाई पहाड़ियों (तमिलनाडु) में पनामालाई चित्रकला का विकास हुआ।
B. गुप्तकालीन देवगढ़ का दशावतार मंदिर उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में देवगढ़ नामक स्थान पर स्थित है। चन्देल शासकों द्वारा खजुराहो में बनवाये गये 25 मंदिर आज भी विद्यमान हैं। इनका निर्माण ग्रेनाइट तथा लाल बलुआ पत्थरों से किया गया है। ये शैव, वैष्णव तथा जैन धर्मों से संबंधित है। प्रत्येक मंदिर में मण्डप, अर्धमण्डप तथा अन्तराल मिलते हैं। प्रवेश द्वार को मकरतोरण से सजाया गया है। खजुराहो के मंदिरों में कन्दरिया महादेव मंदिर सर्वश्रेष्ठ है। इसके गर्भगृह में संगमरमर का शिवलिंग स्थापित है। चालुक्य मंदिरों के उत्कृष्ट नमूने बादामी, एहोल, पत्तडकल से प्राप्त होते हैं। बादामी में पाषाण को काटकर चार स्तम्भयुक्त मण्डप बनाये गये हैं। इनसे तीन हिन्दू तथा एक जैन धर्म से संबंधित है। प्रत्येक में स्तम्भयुक्त बरामदा, मेहराब युक्त हाल, एक छोटा वर्गाकार गर्भगृह है। पल्लव नरेश नरसिंह वर्मन ने वातापी को जीतकर `वातापीकोण्ड' की उपाधि धारण की थी। पल्लव काल में पनामालाई पहाड़ियों (तमिलनाडु) में पनामालाई चित्रकला का विकास हुआ।

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गुप्तकालीन देवगढ़ का दशावतार मंदिर उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में देवगढ़ नामक स्थान पर स्थित है। चन्देल शासकों द्वारा खजुराहो में बनवाये गये 25 मंदिर आज भी विद्यमान हैं। इनका निर्माण ग्रेनाइट तथा लाल बलुआ पत्थरों से किया गया है। ये शैव, वैष्णव तथा जैन धर्मों से संबंधित है। प्रत्येक मंदिर में मण्डप, अर्धमण्डप तथा अन्तराल मिलते हैं। प्रवेश द्वार को मकरतोरण से सजाया गया है। खजुराहो के मंदिरों में कन्दरिया महादेव मंदिर सर्वश्रेष्ठ है। इसके गर्भगृह में संगमरमर का शिवलिंग स्थापित है। चालुक्य मंदिरों के उत्कृष्ट नमूने बादामी, एहोल, पत्तडकल से प्राप्त होते हैं। बादामी में पाषाण को काटकर चार स्तम्भयुक्त मण्डप बनाये गये हैं। इनसे तीन हिन्दू तथा एक जैन धर्म से संबंधित है। प्रत्येक में स्तम्भयुक्त बरामदा, मेहराब युक्त हाल, एक छोटा वर्गाकार गर्भगृह है। पल्लव नरेश नरसिंह वर्मन ने वातापी को जीतकर `वातापीकोण्ड' की उपाधि धारण की थी। पल्लव काल में पनामालाई पहाड़ियों (तमिलनाडु) में पनामालाई चित्रकला का विकास हुआ।