Correct Answer:
Option A - मैथिलीशरण गुप्त कृत ‘साकेत ’ (1931 ई.) काव्य के नवम सर्ग की निम्नलिखित पंक्तियाँ पहले से बाद के क्रम में इस प्रकार हैं-
1. करुणे, क्यों रोती है? ‘उत्तर’ में और अधिक तू रोई।
2. मानस मन्दिर में सती, पति की प्रतिमा थाप।
3. वेदने तू भी भली बनी।
4. सखि पतंग भी जलता है हाँ दीपक भी जलता है।
5. निरख सखी, ये खंजन आये।
• हिंदी साहित्य में ‘रामचरितमानस’ के बाद रामकाव्य का दूसरा स्तम्भ मैथिलीशरण गुप्त कृत ‘साकेत’ है।
• साकेत महाकाव्य में 12 सर्ग हैं।
• इस कृति में राम के भाई लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला के विरह का जो चित्रण गुप्त जी ने किया है वह अत्यधिक मार्मिक और गहरी मानवीय संवेदनाओं और भावनाओं से ओत-प्रोत है।
गुप्त जी के प्रमुख काव्य ग्रंथ - रंग में भंग, जयद्रथवध, भारत-भारती, यशोधरा, द्वापर, जय भारत, विष्णु प्रिया,सिद्धराज, पंचवटी इत्यादि।
A. मैथिलीशरण गुप्त कृत ‘साकेत ’ (1931 ई.) काव्य के नवम सर्ग की निम्नलिखित पंक्तियाँ पहले से बाद के क्रम में इस प्रकार हैं-
1. करुणे, क्यों रोती है? ‘उत्तर’ में और अधिक तू रोई।
2. मानस मन्दिर में सती, पति की प्रतिमा थाप।
3. वेदने तू भी भली बनी।
4. सखि पतंग भी जलता है हाँ दीपक भी जलता है।
5. निरख सखी, ये खंजन आये।
• हिंदी साहित्य में ‘रामचरितमानस’ के बाद रामकाव्य का दूसरा स्तम्भ मैथिलीशरण गुप्त कृत ‘साकेत’ है।
• साकेत महाकाव्य में 12 सर्ग हैं।
• इस कृति में राम के भाई लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला के विरह का जो चित्रण गुप्त जी ने किया है वह अत्यधिक मार्मिक और गहरी मानवीय संवेदनाओं और भावनाओं से ओत-प्रोत है।
गुप्त जी के प्रमुख काव्य ग्रंथ - रंग में भंग, जयद्रथवध, भारत-भारती, यशोधरा, द्वापर, जय भारत, विष्णु प्रिया,सिद्धराज, पंचवटी इत्यादि।