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Q: .
  • A. रामप्रसाद निरंजनी
  • B. इंशा अल्ला खाँ
  • C. सदासुख लाल ‘नियाज’
  • D. लल्लू लाल
Correct Answer: Option C - : ‘रस्मोरिवाज भाखा का दुनिया से उठ गया’ यह कथन सदासुख लाल ‘नियाज’ का है। मुंशी सदासुखलाल नियाज ने खड़ी बोली में ‘सुखसागर’ की रचना ‘विष्णु पुराण’ के आधार पर किया गया है। खड़ी बोली गद्य को एक साथ बढ़ाने वाले चार महानुभाव हुए हैं- 1. मुंशी सदासुख लाल नियाज, 2. सैयद इंशा अल्ला खां 3. लल्लूलाल तथा 4. सदल मिश्र। मुंशी सदासुखलाल तथा इंशाअल्ला खां इन दोनों का संबंध फोर्ट विलियम कॉलेज से नहीं था।
C. : ‘रस्मोरिवाज भाखा का दुनिया से उठ गया’ यह कथन सदासुख लाल ‘नियाज’ का है। मुंशी सदासुखलाल नियाज ने खड़ी बोली में ‘सुखसागर’ की रचना ‘विष्णु पुराण’ के आधार पर किया गया है। खड़ी बोली गद्य को एक साथ बढ़ाने वाले चार महानुभाव हुए हैं- 1. मुंशी सदासुख लाल नियाज, 2. सैयद इंशा अल्ला खां 3. लल्लूलाल तथा 4. सदल मिश्र। मुंशी सदासुखलाल तथा इंशाअल्ला खां इन दोनों का संबंध फोर्ट विलियम कॉलेज से नहीं था।

Explanations:

: ‘रस्मोरिवाज भाखा का दुनिया से उठ गया’ यह कथन सदासुख लाल ‘नियाज’ का है। मुंशी सदासुखलाल नियाज ने खड़ी बोली में ‘सुखसागर’ की रचना ‘विष्णु पुराण’ के आधार पर किया गया है। खड़ी बोली गद्य को एक साथ बढ़ाने वाले चार महानुभाव हुए हैं- 1. मुंशी सदासुख लाल नियाज, 2. सैयद इंशा अल्ला खां 3. लल्लूलाल तथा 4. सदल मिश्र। मुंशी सदासुखलाल तथा इंशाअल्ला खां इन दोनों का संबंध फोर्ट विलियम कॉलेज से नहीं था।