कौन-सा ड्रिल लंबी कुंडली के स्थान पर टूटी चिप का उत्पादन करती है?
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The speed of a synchronous motor depends upon? तुल्यकालिक मोटर की गति किस पर निर्भर करती है?
अपसृते च तस्मिन् स विहङ्गराजो राजाभिमुखो भूत्वा समुन्नमय्य दक्षिणं चरणमतिस्पष्टवर्ण-स्वरसंस्कारया गिरा कृतजयशब्दो राजानमुद्दिश्यार्य्यामिमां पपाठ – ‘‘स्तनयुगमश्रुस्नातं समीपतरवत्र्ति हृदयशोकाग्ने:। चरति विमुक्ताहारं व्रतमिव भवतो रिपुस्त्रीणाम्।।’’ राजा तु तामार्यां श्रुत्वा संजातविस्मय: सहर्षमासन्नवत्र्तिनम् अतिमहार्घहेमासनोपविष्टम् अमरगुरुमिवाशेषनीतिशास्त्रपारगम् अतिवय- समग्रजन्मानमखिलमन्मित्रमण्डलप्रधानममात्यं कुमारपालितनामानमब्रवीत श्रुता भवद्भिरस्य विहङ्गमस्य स्पष्टता वर्णोच्चारणे स्वरे च मधुरता! प्रथमं तावदिदमेव महदाश्चर्यम्, यदयमसङ्कीर्णवर्ण प्रविभागामव्यक्तमात्रानुस्वार-स्वरसंस्कारयोगां विशेषसंयुक्ताम् अतिपरिस्फुटाक्षरां गिरमुदीरयति। 3.समस्त मन्त्रिमण्डल में प्रधानमंत्री हैं–
Specifications for hold fasts are given in terms of _____:
विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है:
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Which was declared as India's first constitution literate district in January, 2023?
What will be the interest on रु 4600 in 5 years at the rate of 4.5% per annual simple interest?
निर्देश : नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं. 334 से 342) के सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। लघु उद्योग उन उद्योगों को कहा जाता है जिनके समारम्भ एवं आयोजन के लिए भारी-भरकम साधनों की आवश्यकता नहीं पड़ती। वे थोडे-से स्थान पर, थोड़ी पूँजी और अल्प साधनों से ही आरम्भ किए जा सकते हैं। फिर भी उनसे सुनियोजित ढंग से अधिकाधिक लाभ प्राप्त करके देश की निर्धनता, गरीबी और विषमताओं से एक सीमा तक लड़ा जा सकता है। अपने आकार-प्रकार तथा साधनों की लघुता व अल्पता के कारण ही इस प्रकार के उद्योग-धंधों को कुटीर-उद्योग भी कहा जाता है। इस प्रकार के उद्योग-धंधे अपने घर में भी आरम्भ किए जा सकते हैं और अपने सीमित साधनों का सदुपयोग करके आर्थिक लाभ कमाया जा सकता है और सुखी-समृद्ध बना जा सकता है। भारत जैसे देश के लिए तो इस प्रकार के लघु उद्योगों का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यहाँ युवाओं की एक बहुत बड़ी संख्या बेरोजगार है। इसी कारण महात्मा गांधी ने मशीनीकरण का विरोध किया था। उनकी यह स्पष्ट धारणा थी कि लघु उद्योगों को प्रश्रय देने से लोग स्वावलम्बी बनेंगे, मजदूर-किसान फसलों की बुआई-कुटाई से फुर्सत पाकर अपने खाली समय का सदुपयोग भी करेंगे। इस प्रकार आर्थिक समृद्धि तो बढ़ेगी ही, साथ ही लोगों को अपने घर के पास रोजगार मिल सकेगा। ‘विषमता’ का विपरीतार्थी है:
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