Correct Answer:
Option C - उपनयन संस्कार को यज्ञोपवीत संस्कार के नाम से भी जानते हैं, इसमें बच्चे को पवित्र जनेऊ (यज्ञोपवीत) धारण कराया जाता है। इसमें तीन धागे होते हैं, जिन्हें सत्, रज एवं तम का प्रतीक माना जाता है।
`प्राचीन समय से आज के समय तक में इस संस्कार का स्वरूप बिल्कुल बदल चुका है-
पहले इस संस्कार को शुद्धिकरण संस्कार के रूप में जानते थे जिसके उपरान्त शिष्य गुरू के साथ आश्रम में रहकर शिक्षा ग्रहण करते थे। इस संस्कार के उपरान्त बालकों को ‘द्विज’ कहा जाता था। पहले यह अनिवार्य नहीं था। परन्तु कर्मकाण्डों में इसे अनिवार्य कर दिया गया तथा सामान्यत: विवाहपूर्व किया जाने लगा।
C. उपनयन संस्कार को यज्ञोपवीत संस्कार के नाम से भी जानते हैं, इसमें बच्चे को पवित्र जनेऊ (यज्ञोपवीत) धारण कराया जाता है। इसमें तीन धागे होते हैं, जिन्हें सत्, रज एवं तम का प्रतीक माना जाता है।
`प्राचीन समय से आज के समय तक में इस संस्कार का स्वरूप बिल्कुल बदल चुका है-
पहले इस संस्कार को शुद्धिकरण संस्कार के रूप में जानते थे जिसके उपरान्त शिष्य गुरू के साथ आश्रम में रहकर शिक्षा ग्रहण करते थे। इस संस्कार के उपरान्त बालकों को ‘द्विज’ कहा जाता था। पहले यह अनिवार्य नहीं था। परन्तु कर्मकाण्डों में इसे अनिवार्य कर दिया गया तथा सामान्यत: विवाहपूर्व किया जाने लगा।