Correct Answer:
Option C - पियाजे के मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (7-10 वर्ष) के अनुसार, बच्चा मूर्त चीजों के लिए ज्यादा तार्किक लेकिन अमूर्त विचारों का अभाव की अवस्था में पाया जाता है।
मूर्त संक्रियात्मक अवस्था पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धान्त की तीसरी अवस्था है। इस अवस्था में बच्चे संख्या, क्षेत्र, आयतन और अभिविन्यास के संरक्षण की क्षमता प्राप्त करते हैं। इस अवस्था में बालक विद्यालय जाना प्रारम्भ कर लेता है एवं वस्तुओं एवं घटनाओं के बीच समानता, भिन्नता समझने की क्षमता उत्पन्न हो जाती है।
C. पियाजे के मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (7-10 वर्ष) के अनुसार, बच्चा मूर्त चीजों के लिए ज्यादा तार्किक लेकिन अमूर्त विचारों का अभाव की अवस्था में पाया जाता है।
मूर्त संक्रियात्मक अवस्था पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धान्त की तीसरी अवस्था है। इस अवस्था में बच्चे संख्या, क्षेत्र, आयतन और अभिविन्यास के संरक्षण की क्षमता प्राप्त करते हैं। इस अवस्था में बालक विद्यालय जाना प्रारम्भ कर लेता है एवं वस्तुओं एवं घटनाओं के बीच समानता, भिन्नता समझने की क्षमता उत्पन्न हो जाती है।