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Q: ,
  • A. मंगल
  • B. बुध
  • C. बृहस्पति
  • D. शुक्र
Correct Answer: Option C - महाकुम्भ मेले की तिथि खगोलीय रूप से सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति की स्थिति का अध्ययन करने के बाद निर्धारित की जाती है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार कुम्भ का असाधारण महत्व बृहस्पति के कुम्भ राशि में प्रवेश तथा सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ जुड़ा है। कुम्भ मेला चार स्थानों-प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में आयोजित होता है। इनमें से प्रत्येक स्थान पर प्रति 12वें वर्ष तथा प्रयागराज में दो महाकुम्भ पर्वों के बीच छह वर्षों के अन्तराल में कुम्भ आयोजित होता है।
C. महाकुम्भ मेले की तिथि खगोलीय रूप से सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति की स्थिति का अध्ययन करने के बाद निर्धारित की जाती है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार कुम्भ का असाधारण महत्व बृहस्पति के कुम्भ राशि में प्रवेश तथा सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ जुड़ा है। कुम्भ मेला चार स्थानों-प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में आयोजित होता है। इनमें से प्रत्येक स्थान पर प्रति 12वें वर्ष तथा प्रयागराज में दो महाकुम्भ पर्वों के बीच छह वर्षों के अन्तराल में कुम्भ आयोजित होता है।

Explanations:

महाकुम्भ मेले की तिथि खगोलीय रूप से सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति की स्थिति का अध्ययन करने के बाद निर्धारित की जाती है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार कुम्भ का असाधारण महत्व बृहस्पति के कुम्भ राशि में प्रवेश तथा सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ जुड़ा है। कुम्भ मेला चार स्थानों-प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में आयोजित होता है। इनमें से प्रत्येक स्थान पर प्रति 12वें वर्ष तथा प्रयागराज में दो महाकुम्भ पर्वों के बीच छह वर्षों के अन्तराल में कुम्भ आयोजित होता है।