Correct Answer:
Option D - झूम खेती आदिवासियों द्वारा प्रचलित खेती है जो पूर्वोत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्र नागालैण्ड, मेघालय में की जाती है। इस खेती में एक फसल कटने के बाद जमीन को कुछ साल तक ऐसे ही छोड़ देते हैं, उसमें खेती नहीं करते हैं। इस जगह पर जो बाँस या जंगल उग जाता है उसे उखाड़ते नहीं बस गिराकर जला देते हैं। यह राख जमीन में खाद का काम करती है। जमीन को जलाते हुए आस-पास के पेड़ न जले, जंगलों को नुकसान न पहुँचे यह भी देखना पड़ता है। फिर जब इस जमीन की बारी आती है तो जमीन को जोता नहीं जाता है। मिट्टी को हल्के से हिलाकर बीज छिड़क देते हैं। एक ही खेत में अलग-अलग तरह के बीज जैसे- मकई, सब्जियाँ, मिर्च और चावल बोए जाते हैं।
D. झूम खेती आदिवासियों द्वारा प्रचलित खेती है जो पूर्वोत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्र नागालैण्ड, मेघालय में की जाती है। इस खेती में एक फसल कटने के बाद जमीन को कुछ साल तक ऐसे ही छोड़ देते हैं, उसमें खेती नहीं करते हैं। इस जगह पर जो बाँस या जंगल उग जाता है उसे उखाड़ते नहीं बस गिराकर जला देते हैं। यह राख जमीन में खाद का काम करती है। जमीन को जलाते हुए आस-पास के पेड़ न जले, जंगलों को नुकसान न पहुँचे यह भी देखना पड़ता है। फिर जब इस जमीन की बारी आती है तो जमीन को जोता नहीं जाता है। मिट्टी को हल्के से हिलाकर बीज छिड़क देते हैं। एक ही खेत में अलग-अलग तरह के बीज जैसे- मकई, सब्जियाँ, मिर्च और चावल बोए जाते हैं।