search
Q: .
  • A. कुंभ मेले में
  • B. नौचंदी मेले में
  • C. सोनपुर मेले में
  • D. ददरी मेले में
Correct Answer: Option D - ‘भारत वर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है’ निबन्ध को भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने पहले व्याख्यान के रूप में ‘ददरी मेले’ में प्रस्तुत किया। ⇒ 1884 ई. में बलिया के ददरी मेले में आयोजित ‘आर्य-देशोपकरिणी सभा’ में भाषण के लिए भारतेन्दु ने ‘भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है’ की रचना की, जिसमें रूढि़यों, अंधविश्वासों तथा कुरीतियों को पीछे छोड़ शिक्षा ग्रहण करने, उद्योग लगाने एवं आपसी सहयोग की प्रेरणा दी। इसकी अंतिम पंक्ति ‘‘परदेशी वस्तु और परदेशी भाषा का भरोसा मत रखो। अपने देश में अपनी भाषा में उन्नति करो।
D. ‘भारत वर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है’ निबन्ध को भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने पहले व्याख्यान के रूप में ‘ददरी मेले’ में प्रस्तुत किया। ⇒ 1884 ई. में बलिया के ददरी मेले में आयोजित ‘आर्य-देशोपकरिणी सभा’ में भाषण के लिए भारतेन्दु ने ‘भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है’ की रचना की, जिसमें रूढि़यों, अंधविश्वासों तथा कुरीतियों को पीछे छोड़ शिक्षा ग्रहण करने, उद्योग लगाने एवं आपसी सहयोग की प्रेरणा दी। इसकी अंतिम पंक्ति ‘‘परदेशी वस्तु और परदेशी भाषा का भरोसा मत रखो। अपने देश में अपनी भाषा में उन्नति करो।

Explanations:

‘भारत वर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है’ निबन्ध को भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने पहले व्याख्यान के रूप में ‘ददरी मेले’ में प्रस्तुत किया। ⇒ 1884 ई. में बलिया के ददरी मेले में आयोजित ‘आर्य-देशोपकरिणी सभा’ में भाषण के लिए भारतेन्दु ने ‘भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है’ की रचना की, जिसमें रूढि़यों, अंधविश्वासों तथा कुरीतियों को पीछे छोड़ शिक्षा ग्रहण करने, उद्योग लगाने एवं आपसी सहयोग की प्रेरणा दी। इसकी अंतिम पंक्ति ‘‘परदेशी वस्तु और परदेशी भाषा का भरोसा मत रखो। अपने देश में अपनी भाषा में उन्नति करो।