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  • A. पर्यंक, सूत, दूध
  • B. मयूर, महिष, ज्येष्ठ
  • C. जिह्रा, रात, बात
  • D. क्षेत्र, कृषक, ऊँट
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option B - दिये गये समूह (मयूर, महिष, ज्येष्ठ) के सभी शब्द तत्सम हैं, जिनके तद्भव रूप क्रमश: मोर, भैंस तथा जेठ है। तत्सम शब्द संस्कृत भाषा के शब्द (तत् ± सम) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है ‘ज्यों का त्यों’ अर्थात ‘संस्कृत के समान’। अत: वे शब्द जिन्हें हम संस्कृत से बिना किसी बदलाव के ज्यों का त्यों उपयोग में लाते हैं, ‘तत्सम’ शब्द कहलाते हैं तथा संस्कृत के वे शब्द जिनमें थोड़ा बदलाव करके हिन्दी में उपयोग में लाया जाता है ‘तद्भव’ शब्द कहलाते हैं।
B. दिये गये समूह (मयूर, महिष, ज्येष्ठ) के सभी शब्द तत्सम हैं, जिनके तद्भव रूप क्रमश: मोर, भैंस तथा जेठ है। तत्सम शब्द संस्कृत भाषा के शब्द (तत् ± सम) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है ‘ज्यों का त्यों’ अर्थात ‘संस्कृत के समान’। अत: वे शब्द जिन्हें हम संस्कृत से बिना किसी बदलाव के ज्यों का त्यों उपयोग में लाते हैं, ‘तत्सम’ शब्द कहलाते हैं तथा संस्कृत के वे शब्द जिनमें थोड़ा बदलाव करके हिन्दी में उपयोग में लाया जाता है ‘तद्भव’ शब्द कहलाते हैं।

Explanations:

दिये गये समूह (मयूर, महिष, ज्येष्ठ) के सभी शब्द तत्सम हैं, जिनके तद्भव रूप क्रमश: मोर, भैंस तथा जेठ है। तत्सम शब्द संस्कृत भाषा के शब्द (तत् ± सम) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है ‘ज्यों का त्यों’ अर्थात ‘संस्कृत के समान’। अत: वे शब्द जिन्हें हम संस्कृत से बिना किसी बदलाव के ज्यों का त्यों उपयोग में लाते हैं, ‘तत्सम’ शब्द कहलाते हैं तथा संस्कृत के वे शब्द जिनमें थोड़ा बदलाव करके हिन्दी में उपयोग में लाया जाता है ‘तद्भव’ शब्द कहलाते हैं।