Correct Answer:
Option B - ‘अपना-अपना भाग्य’ कहानी के संदर्भ में दिए गए उपयुक्त कथन निम्नवत् हैं-
• पोलो लॉन में हॉकी खेलते बच्चों को न आगे की चिंता थी न बीते का ख्याल था।
• मैली-सी कमीज लटकाए हुए दस बरस के लड़के का माथा जैसे अभी से झुर्रियां खा गया था।
• प्रकृति ने लड़के के शव के लिए सफेद और ठण्डे कफन का प्रबंध कर दिया था।
• ‘अपना-अपना भाग्य’ कहानी के कहानीकार जैनेन्द्र हैं।
चर्चित कहानियाँ - स्पर्द्धा, पत्नी, एक कैदी, गदर के बाद, बाहुबली, तत्सत, लाल सरोवर, मास्टर जी, जाह्नवी आदि।
जैनेन्द्र की प्रथम कहानी ‘खेल’ (1928) है जो विशाल भारत में प्रकाशित हुई।
जैनेन्द्र के प्रमुख कहानी संग्रह - फाँसी (1929), वातायन (1930), दो चिडि़या (1934), एक रात (1935), नील देश की राजकन्या (1938), ध्रुव यात्रा (1944), पाजेब (1942), जय सन्धि (1949)।
B. ‘अपना-अपना भाग्य’ कहानी के संदर्भ में दिए गए उपयुक्त कथन निम्नवत् हैं-
• पोलो लॉन में हॉकी खेलते बच्चों को न आगे की चिंता थी न बीते का ख्याल था।
• मैली-सी कमीज लटकाए हुए दस बरस के लड़के का माथा जैसे अभी से झुर्रियां खा गया था।
• प्रकृति ने लड़के के शव के लिए सफेद और ठण्डे कफन का प्रबंध कर दिया था।
• ‘अपना-अपना भाग्य’ कहानी के कहानीकार जैनेन्द्र हैं।
चर्चित कहानियाँ - स्पर्द्धा, पत्नी, एक कैदी, गदर के बाद, बाहुबली, तत्सत, लाल सरोवर, मास्टर जी, जाह्नवी आदि।
जैनेन्द्र की प्रथम कहानी ‘खेल’ (1928) है जो विशाल भारत में प्रकाशित हुई।
जैनेन्द्र के प्रमुख कहानी संग्रह - फाँसी (1929), वातायन (1930), दो चिडि़या (1934), एक रात (1935), नील देश की राजकन्या (1938), ध्रुव यात्रा (1944), पाजेब (1942), जय सन्धि (1949)।