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Q: .
  • A. प्रियंगुमंजरी
  • B. मिल्लिका
  • C. कालिदास
  • D. विलोम
Correct Answer: Option A - ‘इस सौन्दर्य के सामने जीवन की सब सुविधाएँ हेय हैं। इसे आँखों में व्याप्त करने के लिए जीवन भर का समय पर्याप्त नहीं है।’’ ‘आषाढ़ का एक दिन’ नाटक में यह संवाद ‘प्रियंगुमंजरी’ का है। ‘आषाढ़ का एक दिन’ (1958 ई.) नाटक के लेखक मोहन राकेश हैं। इस नाटक के प्रमुख पात्र हैं– कालिदास, विलोम, मातुल, दंतुल तथा नारीपात्र–मिल्लिका, अम्बिका, प्रियंगुमंजरी आदि।
A. ‘इस सौन्दर्य के सामने जीवन की सब सुविधाएँ हेय हैं। इसे आँखों में व्याप्त करने के लिए जीवन भर का समय पर्याप्त नहीं है।’’ ‘आषाढ़ का एक दिन’ नाटक में यह संवाद ‘प्रियंगुमंजरी’ का है। ‘आषाढ़ का एक दिन’ (1958 ई.) नाटक के लेखक मोहन राकेश हैं। इस नाटक के प्रमुख पात्र हैं– कालिदास, विलोम, मातुल, दंतुल तथा नारीपात्र–मिल्लिका, अम्बिका, प्रियंगुमंजरी आदि।

Explanations:

‘इस सौन्दर्य के सामने जीवन की सब सुविधाएँ हेय हैं। इसे आँखों में व्याप्त करने के लिए जीवन भर का समय पर्याप्त नहीं है।’’ ‘आषाढ़ का एक दिन’ नाटक में यह संवाद ‘प्रियंगुमंजरी’ का है। ‘आषाढ़ का एक दिन’ (1958 ई.) नाटक के लेखक मोहन राकेश हैं। इस नाटक के प्रमुख पात्र हैं– कालिदास, विलोम, मातुल, दंतुल तथा नारीपात्र–मिल्लिका, अम्बिका, प्रियंगुमंजरी आदि।