Correct Answer:
Option B - ‘नागमती वियोगखण्ड’ की निम्नलिखित पंक्तियाँ पहले से बाद के क्रम में इस प्रकार हैं-
1. झुरि झुरि पींजर हैं। भई बिरह काल मोहि दीन्ह।
2. जिन्ह घर कंता ते सुखी, तिन्ह गारौ औ गर्व।
3. पिउ सौ कहेउ संदेसड़ा, हे भौंरा! हे काग!
4. यह तन जारौं छार कै, कहौं कि ‘पवन! उड़ाव’!
5. बरस दिवस धन रोइ कै, हारि परि चित झंखि।
• मलिक मोहम्मद जायसी कृत ‘पदमावत’ का ‘नागमती वियोग खण्ड’ हिंदी साहित्य की अनुपम निधि है।
• जायसी कृत पदमावत में कुल 57 खण्ड हैं और इनका प्रिय अलंकार उत्प्रेक्षा है।
• जायसी द्वारा रचित महत्वपूर्ण ग्रंथ - पद्मावत, अखरावट, आखिरी कलाम, चित्ररेखा, कहरानामा, मसलानामा, कन्हावत।
B. ‘नागमती वियोगखण्ड’ की निम्नलिखित पंक्तियाँ पहले से बाद के क्रम में इस प्रकार हैं-
1. झुरि झुरि पींजर हैं। भई बिरह काल मोहि दीन्ह।
2. जिन्ह घर कंता ते सुखी, तिन्ह गारौ औ गर्व।
3. पिउ सौ कहेउ संदेसड़ा, हे भौंरा! हे काग!
4. यह तन जारौं छार कै, कहौं कि ‘पवन! उड़ाव’!
5. बरस दिवस धन रोइ कै, हारि परि चित झंखि।
• मलिक मोहम्मद जायसी कृत ‘पदमावत’ का ‘नागमती वियोग खण्ड’ हिंदी साहित्य की अनुपम निधि है।
• जायसी कृत पदमावत में कुल 57 खण्ड हैं और इनका प्रिय अलंकार उत्प्रेक्षा है।
• जायसी द्वारा रचित महत्वपूर्ण ग्रंथ - पद्मावत, अखरावट, आखिरी कलाम, चित्ररेखा, कहरानामा, मसलानामा, कन्हावत।