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  • A. इष् + शतृ + आ (तृतीया-एकवचनम्)
  • B. इच्छ + क्त + स्त्रीलिङ् + प्रथमा-एकवचनम्
  • C. इच्छ् + अच् + ता + तृतीया-एकवचनम्
  • D. इष् + अत् + आ
Correct Answer: Option A - `इच्छता' पदस्य निर्वचनम् `इष् + शतृ + आ' (तृतीया एकवचनम्) भवति। इच्छता इस पद का निर्वचन `इष् + शतृ + आ' होगा। शतृ प्रत्यय कर्ता के विशेषण के रूप में प्रयुक्त होते है। इसके रूप तीनों लिङ्गों में होते हैं। • वर्तमान काल के अर्थ में अर्थात् गच्छन् (जाते हुए) लिखन् (लिखते हुए) इस अर्थ में परस्मैपदी धातुओं के साथ `शतृ' प्रत्यय लगता है। इसका रूप पुल्लिङ्ग में पठत् के समान स्त्रीलिङ्ग में नदी के समान और नपुंसकलिङ्ग में जगत् के समान रूप चलता है।
A. `इच्छता' पदस्य निर्वचनम् `इष् + शतृ + आ' (तृतीया एकवचनम्) भवति। इच्छता इस पद का निर्वचन `इष् + शतृ + आ' होगा। शतृ प्रत्यय कर्ता के विशेषण के रूप में प्रयुक्त होते है। इसके रूप तीनों लिङ्गों में होते हैं। • वर्तमान काल के अर्थ में अर्थात् गच्छन् (जाते हुए) लिखन् (लिखते हुए) इस अर्थ में परस्मैपदी धातुओं के साथ `शतृ' प्रत्यय लगता है। इसका रूप पुल्लिङ्ग में पठत् के समान स्त्रीलिङ्ग में नदी के समान और नपुंसकलिङ्ग में जगत् के समान रूप चलता है।

Explanations:

`इच्छता' पदस्य निर्वचनम् `इष् + शतृ + आ' (तृतीया एकवचनम्) भवति। इच्छता इस पद का निर्वचन `इष् + शतृ + आ' होगा। शतृ प्रत्यय कर्ता के विशेषण के रूप में प्रयुक्त होते है। इसके रूप तीनों लिङ्गों में होते हैं। • वर्तमान काल के अर्थ में अर्थात् गच्छन् (जाते हुए) लिखन् (लिखते हुए) इस अर्थ में परस्मैपदी धातुओं के साथ `शतृ' प्रत्यय लगता है। इसका रूप पुल्लिङ्ग में पठत् के समान स्त्रीलिङ्ग में नदी के समान और नपुंसकलिङ्ग में जगत् के समान रूप चलता है।