Correct Answer:
Option C - ‘कार्ल मार्क्स-द्वंद्वात्मक भौतिकवाद’, ‘सात्र्र-आस्तित्वाद’, ‘अरस्तू-विरेचन’ सही युग्म है।
⇒ माक्र्सवाद एक जटिल विचार धारा है जिसमें बहुत से विचार निहित है उन सभी विचारों की समग्रता को ही माक्र्सवाद कहा जाता है। इसके तीन अनिवार्य घटक है-
⇒ द्वंद्वात्मक और ऐतिहासिक भौतिकवाद
⇒ राजनीतिक अर्थशास्त्र
⇒ वैज्ञानिक समाजवाद
⇒ द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद का सम्बन्ध प्रकृति और जगत के नियमों की व्याख्या से है।
⇒ सभी पूर्व मान्य सामाजिक, धार्मिक व नैतिक परम्पराओं के विरोध में सर्वप्रथम आवा डेनिश विद्धान सोरेन कीर्केगाड ने उठाई। इन्हें ही अस्तित्ववाद का प्रणेता माना जाता है। अस्तित्ववाद को पुष्ट करने वालों में, नीत्शे, कार्ल जेस्पर्स, मार्टिन हाइडेगर, मार्शल, सात्र्र, कामू, सिमोन द बउआ आदि प्रमुख है।
⇒ साहित्स में सर्वप्रथम ‘विरेचन’ शब्द का प्रयोग को श्रेय अरस्तु को प्राप्त हैै। ‘विरेचन’ यूनानी शब्द ‘कथार्सिस’ का हिन्दी रूपान्तरण है। विरेचन और कथार्सिस चिकित्साशास्त्र के परिभाषिक शब्द है। अरस्तू के अनुसार भावों का दमन हानिकारक और अहितकर है। उसका संतुलन जीवन के लिए अनिवार्य है। विरेचन भावनात्मक विश्रान्ति के साथ-साथ भावनात्मक परिष्कार भी करता है।
⇒ इलिटय का ‘निर्वैयक्तिकता का सिद्धान्त’ और परम्परा का सिद्धान्त है।
⇒ देरिदा का सम्बन्ध विखण्डवाद से है।
C. ‘कार्ल मार्क्स-द्वंद्वात्मक भौतिकवाद’, ‘सात्र्र-आस्तित्वाद’, ‘अरस्तू-विरेचन’ सही युग्म है।
⇒ माक्र्सवाद एक जटिल विचार धारा है जिसमें बहुत से विचार निहित है उन सभी विचारों की समग्रता को ही माक्र्सवाद कहा जाता है। इसके तीन अनिवार्य घटक है-
⇒ द्वंद्वात्मक और ऐतिहासिक भौतिकवाद
⇒ राजनीतिक अर्थशास्त्र
⇒ वैज्ञानिक समाजवाद
⇒ द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद का सम्बन्ध प्रकृति और जगत के नियमों की व्याख्या से है।
⇒ सभी पूर्व मान्य सामाजिक, धार्मिक व नैतिक परम्पराओं के विरोध में सर्वप्रथम आवा डेनिश विद्धान सोरेन कीर्केगाड ने उठाई। इन्हें ही अस्तित्ववाद का प्रणेता माना जाता है। अस्तित्ववाद को पुष्ट करने वालों में, नीत्शे, कार्ल जेस्पर्स, मार्टिन हाइडेगर, मार्शल, सात्र्र, कामू, सिमोन द बउआ आदि प्रमुख है।
⇒ साहित्स में सर्वप्रथम ‘विरेचन’ शब्द का प्रयोग को श्रेय अरस्तु को प्राप्त हैै। ‘विरेचन’ यूनानी शब्द ‘कथार्सिस’ का हिन्दी रूपान्तरण है। विरेचन और कथार्सिस चिकित्साशास्त्र के परिभाषिक शब्द है। अरस्तू के अनुसार भावों का दमन हानिकारक और अहितकर है। उसका संतुलन जीवन के लिए अनिवार्य है। विरेचन भावनात्मक विश्रान्ति के साथ-साथ भावनात्मक परिष्कार भी करता है।
⇒ इलिटय का ‘निर्वैयक्तिकता का सिद्धान्त’ और परम्परा का सिद्धान्त है।
⇒ देरिदा का सम्बन्ध विखण्डवाद से है।