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Q: .
  • A. अलाउद्दीन
  • B. रत्नसेन
  • C. हीरामन शुक
  • D. नागमती
Correct Answer: Option C - मानुस प्रेम भएउँ बैकुंठी। नािंह त काह छार भरि मूठी। पद्मावत में यह कथन हीरामन शुक द्वारा कहा गया है। ‘पद्मावत’ हिन्दी साहित्य के अन्तर्गत सूफी परम्परा का प्रसिद्ध महाकाव्य है। इसके रचनाकार मलिक मुहम्मद जायसी हैं। यह महाकाव्य 57 खण्डों में विभक्त है। दोहा और चौपाई छन्द में लिखे गए इस महाकाव्य की भाषा अवधी है। पद्मावत उपन्यास के प्रमुख पात्र हैं– अलाउद्दीन, रत्नसेन, नागमती तथा हीरामन शुक आदि। जायसी द्वारा रचित अन्य कृतियाँ हैं – अखरावट, आखिरीकलाम, चित्ररेखा, आदि।
C. मानुस प्रेम भएउँ बैकुंठी। नािंह त काह छार भरि मूठी। पद्मावत में यह कथन हीरामन शुक द्वारा कहा गया है। ‘पद्मावत’ हिन्दी साहित्य के अन्तर्गत सूफी परम्परा का प्रसिद्ध महाकाव्य है। इसके रचनाकार मलिक मुहम्मद जायसी हैं। यह महाकाव्य 57 खण्डों में विभक्त है। दोहा और चौपाई छन्द में लिखे गए इस महाकाव्य की भाषा अवधी है। पद्मावत उपन्यास के प्रमुख पात्र हैं– अलाउद्दीन, रत्नसेन, नागमती तथा हीरामन शुक आदि। जायसी द्वारा रचित अन्य कृतियाँ हैं – अखरावट, आखिरीकलाम, चित्ररेखा, आदि।

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मानुस प्रेम भएउँ बैकुंठी। नािंह त काह छार भरि मूठी। पद्मावत में यह कथन हीरामन शुक द्वारा कहा गया है। ‘पद्मावत’ हिन्दी साहित्य के अन्तर्गत सूफी परम्परा का प्रसिद्ध महाकाव्य है। इसके रचनाकार मलिक मुहम्मद जायसी हैं। यह महाकाव्य 57 खण्डों में विभक्त है। दोहा और चौपाई छन्द में लिखे गए इस महाकाव्य की भाषा अवधी है। पद्मावत उपन्यास के प्रमुख पात्र हैं– अलाउद्दीन, रत्नसेन, नागमती तथा हीरामन शुक आदि। जायसी द्वारा रचित अन्य कृतियाँ हैं – अखरावट, आखिरीकलाम, चित्ररेखा, आदि।