Correct Answer:
Option A - पाश्चात्य काव्यशास्त्र के सन्दर्भ में दिए गए सही कथन इस प्रकार हैं -
• कॉलरिज ने कल्पना के दो भेद माने- मुख्य कल्पना तथा गौण कल्पना। दोनों में अन्तर परिणाम एवं कार्यप्रणाली के स्तर पर होता है।
• इलियट ने परम्परा और व्यक्ति-प्रज्ञा निबंध में घोषणा की कविता कवि व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति नहीं, व्यक्तितत्व से पलायन है।
• प्रैक्टिकल क्रिटिसिज्म में अर्थ विचार करते हुए रिचड्र्स ने चार प्रकार के अर्थों का उल्लेख किया- वाच्यार्थ, भावना, बोधव्य के प्रति अभिव्यक्ति, अभिप्राय।
A. पाश्चात्य काव्यशास्त्र के सन्दर्भ में दिए गए सही कथन इस प्रकार हैं -
• कॉलरिज ने कल्पना के दो भेद माने- मुख्य कल्पना तथा गौण कल्पना। दोनों में अन्तर परिणाम एवं कार्यप्रणाली के स्तर पर होता है।
• इलियट ने परम्परा और व्यक्ति-प्रज्ञा निबंध में घोषणा की कविता कवि व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति नहीं, व्यक्तितत्व से पलायन है।
• प्रैक्टिकल क्रिटिसिज्म में अर्थ विचार करते हुए रिचड्र्स ने चार प्रकार के अर्थों का उल्लेख किया- वाच्यार्थ, भावना, बोधव्य के प्रति अभिव्यक्ति, अभिप्राय।