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  • A. रामस्वरूप चतुर्वेदी
  • B. आ. रामचन्द्र शुक्ल
  • C. विश्वनाथ त्रिपाठी
  • D. हजारी प्रसाद द्विवेदी
Correct Answer: Option C - उपर्युक्त कथन आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी का है। ⇒ ‘चीफ की दावत’ भीष्म साहनी की सर्वाधिक लोकप्रिय कहानी है। यह वृद्ध विमर्श की अनुपम कहानी है। कहानी में एक ओर बुजुर्ग माँ के प्रेम और त्याग का चित्रण हुआ है वही दूसरी ओर युवा पुत्र की स्वार्थपरता, हृदयहीनता, अवसरवादिता के माध्यम से नई पीढ़ी की मूल्यहीनता का यथार्थ के धरातल पर कठोर चित्रण किया गया है। भीष्म साहनी की कहानी संग्रह:- भाग्यरेखा (1953), पहला पाठ (1957), भटकती राख (1966), पटरियाँ (1973), वाङ्चू (1978), शोभा यात्रा (1981), निशाचर (1983), पाली (1988), डायन (1998)।
C. उपर्युक्त कथन आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी का है। ⇒ ‘चीफ की दावत’ भीष्म साहनी की सर्वाधिक लोकप्रिय कहानी है। यह वृद्ध विमर्श की अनुपम कहानी है। कहानी में एक ओर बुजुर्ग माँ के प्रेम और त्याग का चित्रण हुआ है वही दूसरी ओर युवा पुत्र की स्वार्थपरता, हृदयहीनता, अवसरवादिता के माध्यम से नई पीढ़ी की मूल्यहीनता का यथार्थ के धरातल पर कठोर चित्रण किया गया है। भीष्म साहनी की कहानी संग्रह:- भाग्यरेखा (1953), पहला पाठ (1957), भटकती राख (1966), पटरियाँ (1973), वाङ्चू (1978), शोभा यात्रा (1981), निशाचर (1983), पाली (1988), डायन (1998)।

Explanations:

उपर्युक्त कथन आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी का है। ⇒ ‘चीफ की दावत’ भीष्म साहनी की सर्वाधिक लोकप्रिय कहानी है। यह वृद्ध विमर्श की अनुपम कहानी है। कहानी में एक ओर बुजुर्ग माँ के प्रेम और त्याग का चित्रण हुआ है वही दूसरी ओर युवा पुत्र की स्वार्थपरता, हृदयहीनता, अवसरवादिता के माध्यम से नई पीढ़ी की मूल्यहीनता का यथार्थ के धरातल पर कठोर चित्रण किया गया है। भीष्म साहनी की कहानी संग्रह:- भाग्यरेखा (1953), पहला पाठ (1957), भटकती राख (1966), पटरियाँ (1973), वाङ्चू (1978), शोभा यात्रा (1981), निशाचर (1983), पाली (1988), डायन (1998)।