search
Q: .
  • A. रसनिधि
  • B. वृंद
  • C. सेनापति
  • D. हठी जी
Correct Answer: Option C - उपर्युक्त पंक्तियों से निर्मित छंद में रीतिकाल के सेनापति कवि ने अपना परिचय दिया है। ⇒ सेनापति भक्तिकाल और रीतिकाल की संधि रेखा पर स्थित कवि है। ये रामभक्ति परम्परा के कवि है। इनका ग्रंथ ‘कवित्त रत्नाकार’ (सं. 1706) का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंश ऋतु-वर्णन है। सेनापति की भाषा परिष्कृत ब्रजभाषा है। श्लिष्ट शब्द-विन्यास इन्हे अत्यधिक प्रिय है। रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार- ‘‘ये बड़े ही सहृदय कवि थे। ऋतु वर्णन तो इनके जैसा और किसी शृंगारी कवि ने नहीं किया।’’ ⇒ रसनिधि रीतिकाल के रीतिसिद्ध काव्य परम्परा के कवि हैं। रतनहजारा, रसनिधि सागर इनकी रचनाएँ है। ⇒ हठी जी रीतिसिद्ध कवि हैं। इन्होंने ‘राधासुधाशतक’ में राधा का चित्रण 103 छन्दों में की। ⇒ वृंद रीतिकाल में नीतिकाव्य लिखने वाले कवि हैं। इन्होंने वृंद सतसई (1704), भाव पंचाशिका (1668), यमक सतसई इत्यादि की रचना की।
C. उपर्युक्त पंक्तियों से निर्मित छंद में रीतिकाल के सेनापति कवि ने अपना परिचय दिया है। ⇒ सेनापति भक्तिकाल और रीतिकाल की संधि रेखा पर स्थित कवि है। ये रामभक्ति परम्परा के कवि है। इनका ग्रंथ ‘कवित्त रत्नाकार’ (सं. 1706) का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंश ऋतु-वर्णन है। सेनापति की भाषा परिष्कृत ब्रजभाषा है। श्लिष्ट शब्द-विन्यास इन्हे अत्यधिक प्रिय है। रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार- ‘‘ये बड़े ही सहृदय कवि थे। ऋतु वर्णन तो इनके जैसा और किसी शृंगारी कवि ने नहीं किया।’’ ⇒ रसनिधि रीतिकाल के रीतिसिद्ध काव्य परम्परा के कवि हैं। रतनहजारा, रसनिधि सागर इनकी रचनाएँ है। ⇒ हठी जी रीतिसिद्ध कवि हैं। इन्होंने ‘राधासुधाशतक’ में राधा का चित्रण 103 छन्दों में की। ⇒ वृंद रीतिकाल में नीतिकाव्य लिखने वाले कवि हैं। इन्होंने वृंद सतसई (1704), भाव पंचाशिका (1668), यमक सतसई इत्यादि की रचना की।

Explanations:

उपर्युक्त पंक्तियों से निर्मित छंद में रीतिकाल के सेनापति कवि ने अपना परिचय दिया है। ⇒ सेनापति भक्तिकाल और रीतिकाल की संधि रेखा पर स्थित कवि है। ये रामभक्ति परम्परा के कवि है। इनका ग्रंथ ‘कवित्त रत्नाकार’ (सं. 1706) का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंश ऋतु-वर्णन है। सेनापति की भाषा परिष्कृत ब्रजभाषा है। श्लिष्ट शब्द-विन्यास इन्हे अत्यधिक प्रिय है। रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार- ‘‘ये बड़े ही सहृदय कवि थे। ऋतु वर्णन तो इनके जैसा और किसी शृंगारी कवि ने नहीं किया।’’ ⇒ रसनिधि रीतिकाल के रीतिसिद्ध काव्य परम्परा के कवि हैं। रतनहजारा, रसनिधि सागर इनकी रचनाएँ है। ⇒ हठी जी रीतिसिद्ध कवि हैं। इन्होंने ‘राधासुधाशतक’ में राधा का चित्रण 103 छन्दों में की। ⇒ वृंद रीतिकाल में नीतिकाव्य लिखने वाले कवि हैं। इन्होंने वृंद सतसई (1704), भाव पंचाशिका (1668), यमक सतसई इत्यादि की रचना की।