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Q: .
  • A. A, C, D, B, E
  • B. C, D, B, E, A
  • C. D, C, B, A, E
  • D. A, C, B, D, A
Correct Answer: Option B - ‘कोसी का घटवार’ के आधार पर गुसाईं के कथनों का पहले से बाद का क्रम इस प्रकार है – 1. सुबह से अब तक दस पंसेरी भी नहीं हुआ। सूरज कहाँ का कहाँ चला गया है। 2. पिछले साल पलटन से लौट आया था, वक्त काटने के लिए यह लगवा लिया। 3. बच्चा है, भूख लग आई होगी, डाँटने से क्या फायदा? 4. लोग ठीक कहते हैं, औरत के हाथ की बनी रोटियों में स्वाद ही दूसरा होता है। 5. कभी चार पैसे जुड़ जाएँ, तो गंगनाथ का जागर लगाकर भूल-चूक की माफी माँग लेना। • ‘कोसी का घटवार’ शेखर जोशी द्वारा रचित कहानी है। इसका प्रकाशन 1958 ई. में हुआ। यह कहानी हैदराबाद से ‘कल्पना पत्रिका’ में प्रकाशित हुई। • कोसी का घटवार पूर्वदीप्ति शैली में लिखी गई है। • ‘कोसी का घटवार’ कहानी निस्वार्थ प्रेम की भावना को दर्शाती है। शेखर जोशी की अन्य कहानियाँ – साथ के लोग (1978 ई.), हलवाहा (1981 ई.), मेरा पहाड़ (1989 ई.), नौरंगी बीमार है (1990 ई.), डांगरी वाले (1994 ई.) आदि।
B. ‘कोसी का घटवार’ के आधार पर गुसाईं के कथनों का पहले से बाद का क्रम इस प्रकार है – 1. सुबह से अब तक दस पंसेरी भी नहीं हुआ। सूरज कहाँ का कहाँ चला गया है। 2. पिछले साल पलटन से लौट आया था, वक्त काटने के लिए यह लगवा लिया। 3. बच्चा है, भूख लग आई होगी, डाँटने से क्या फायदा? 4. लोग ठीक कहते हैं, औरत के हाथ की बनी रोटियों में स्वाद ही दूसरा होता है। 5. कभी चार पैसे जुड़ जाएँ, तो गंगनाथ का जागर लगाकर भूल-चूक की माफी माँग लेना। • ‘कोसी का घटवार’ शेखर जोशी द्वारा रचित कहानी है। इसका प्रकाशन 1958 ई. में हुआ। यह कहानी हैदराबाद से ‘कल्पना पत्रिका’ में प्रकाशित हुई। • कोसी का घटवार पूर्वदीप्ति शैली में लिखी गई है। • ‘कोसी का घटवार’ कहानी निस्वार्थ प्रेम की भावना को दर्शाती है। शेखर जोशी की अन्य कहानियाँ – साथ के लोग (1978 ई.), हलवाहा (1981 ई.), मेरा पहाड़ (1989 ई.), नौरंगी बीमार है (1990 ई.), डांगरी वाले (1994 ई.) आदि।

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‘कोसी का घटवार’ के आधार पर गुसाईं के कथनों का पहले से बाद का क्रम इस प्रकार है – 1. सुबह से अब तक दस पंसेरी भी नहीं हुआ। सूरज कहाँ का कहाँ चला गया है। 2. पिछले साल पलटन से लौट आया था, वक्त काटने के लिए यह लगवा लिया। 3. बच्चा है, भूख लग आई होगी, डाँटने से क्या फायदा? 4. लोग ठीक कहते हैं, औरत के हाथ की बनी रोटियों में स्वाद ही दूसरा होता है। 5. कभी चार पैसे जुड़ जाएँ, तो गंगनाथ का जागर लगाकर भूल-चूक की माफी माँग लेना। • ‘कोसी का घटवार’ शेखर जोशी द्वारा रचित कहानी है। इसका प्रकाशन 1958 ई. में हुआ। यह कहानी हैदराबाद से ‘कल्पना पत्रिका’ में प्रकाशित हुई। • कोसी का घटवार पूर्वदीप्ति शैली में लिखी गई है। • ‘कोसी का घटवार’ कहानी निस्वार्थ प्रेम की भावना को दर्शाती है। शेखर जोशी की अन्य कहानियाँ – साथ के लोग (1978 ई.), हलवाहा (1981 ई.), मेरा पहाड़ (1989 ई.), नौरंगी बीमार है (1990 ई.), डांगरी वाले (1994 ई.) आदि।